बरेली पुलिस और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इज्जतनगर की राजीव एनक्लेव कॉलोनी में चल रहे नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क को खत्म कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान देओरनिया के 24 वर्षीय समीरुद्दीन और बड़ी बिहार के 25 वर्षीय यूसुफ के रूप में हुई है। ये दोनों लोग खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को फर्जी हर्बल उत्पाद बेच रहे थे।
इस गिरोह का एक अन्य साथी इलियास खान अभी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल एक संगठित तरीके से चलाया जा रहा था।
सोशल मीडिया के जरिए ठगी और फर्जी डॉक्टर का खेल
यह गिरोह इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ‘Herbal and Jari Booti’ नाम के हैंडल के जरिए अपना काम कर रहा था। उन्होंने इसके लिए एक कॉल सेंटर और दवाओं को बनाने वाली यूनिट भी स्थापित की थी।
आरोपी समीरुद्दीन केवल आठवीं पास है, लेकिन वह ऑनलाइन ग्राहकों को लुभाने के लिए खुद को डॉक्टर बताता था। वह लोगों को फर्जी परामर्श देता था और उन्हें दवाइयां खरीदने के लिए प्रेरित करता था।
सस्ते सामान से नकली दवाएं बनाकर देशभर में बिक्री
जांच में पता चला कि यह गैंग सहारनपुर और मुरादाबाद के बाजारों से सस्ती सामग्री खरीदता था। इसके बाद इन कच्ची सामग्रियों को प्रोसेस करके कैप्सूल तैयार किए जाते थे।
इन कैप्सूलों पर फर्जी लेबल और जाली मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस लगाए जाते थे, जिसके बाद इन्हें पूरे भारत में बेचा जाता था। यह गिरोह मुख्य रूप से यौन स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज की तलाश करने वाले लोगों को निशाना बनाता था।
दवाओं की लागत और बिक्री की कीमत में भारी अंतर था, जो इस प्रकार था:
- एक यूनिट बनाने की लागत 85 रुपये से 200 रुपये के बीच थी।
- इन नकली दवाओं को 2,000 रुपये तक की ऊंची कीमत पर बेचा जाता था।
छापेमारी में भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान और कैश बरामद
पुलिस ने छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया है। इसमें 12 मोबाइल फोन, छह कंप्यूटर, एक लैपटॉप और आठ मॉनिटर शामिल हैं। इसके अलावा तीन प्रिंटर और छह सेट कीबोर्ड, माउस और चार्जर भी मिले हैं।
सामान की सूची में 85 पैकेट नकली दवाएं, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, 1.99 लाख रुपये नकद, छह चेकबुक और 14 एटीएम कार्ड भी शामिल हैं।
एसपी सिटी मानुष पारिक और एसपी शिवम आशुतोष ने पुष्टि की है कि गिरोह के बैंक खातों की वित्तीय जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे ऑनलाइन मेडिकल विज्ञापनों की सत्यता की जांच करें और बिना योग्य प्रोफेशनल की सलाह के कोई भी अनरेगुलेटेड सप्लीमेंट न लें।









