🏠 आवास की दूसरी किस्त अटकी तो तहसील गेट पर धरने पर बैठा गरीब परिवार, ईंटों का चूल्हा जलाकर जताया विरोध !
रिपोर्ट:- राहुल त्रिपाठी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी :- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्की छत का सपना देख रहे एक गरीब परिवार की परेशानी शनिवार को तहसील परिसर में सामने आई। नगर पंचायत रामसनेहीघाट के दयारामपुरवा जेठबनी निवासी रामबेटी पत्नी स्व. मुन्नन आवास की दूसरी किस्त न मिलने से परेशान होकर अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिवार के साथ एसडीएम कार्यालय के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गईं। विरोध स्वरूप परिवार ने मौके पर ही ईंटों का चूल्हा बनाकर खाना पकाया और प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी।
रामबेटी के अनुसार उनका अनुसूचित जाति का बेहद गरीब परिवार भूमिहीन है। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत उनका आवास स्वीकृत हुआ था। पहली किस्त मिलने के बाद परिवार ने किसी तरह मकान का निर्माण शुरू कराया, लेकिन दूसरी किस्त अब तक नहीं मिल सकी है। उनका कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण कराया जा रहा है, उसे लेकर अब कागजात और मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
परिवार का आरोप है कि पहले अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर लेखपाल ने बंजर भूमि की नाप-जोख कर स्थान निर्धारित किया था। इसी भरोसे पर उन्होंने मकान का निर्माण शुरू कराया। अब जमीन के दस्तावेज मांगे जाने के कारण निर्माण अधर में लटक गया है।
👨👩👧👦 अधूरे मकान में बच्चों के साथ गुजर रही जिंदगी, प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
रामबेटी का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि निजी जमीन खरीदना या अपने संसाधनों से मकान पूरा करना संभव नहीं है। अधूरे मकान में बच्चों के साथ रहना मुश्किल हो गया है और मौसम की मार भी झेलनी पड़ रही है। अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान न होने पर परिवार ने तहसील परिसर में धरना देने का निर्णय लिया।
रामबेटी ने प्रशासन से जमीन का पट्टा कराए जाने और आवास की लंबित दूसरी किस्त जल्द जारी कराने की मांग की है।
धरने की सूचना पर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रभारी माया राम यादव और राष्ट्रीय सचिव डीएन त्यागी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार की समस्या सुनी और प्रशासन से मामले का शीघ्र समाधान कराने की मांग की।
वहीं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार चौधरी ने बताया कि संबंधित परिवार भूमिहीन है और उसके नाम कोई भूमि दर्ज नहीं है। वर्ष 2022 में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी और लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर सरकारी योजना के तहत आवास स्वीकृत किया गया था। वर्तमान में लेखपाल से मामले की दोबारा जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी और आगे का निर्णय उच्चाधिकारियों के स्तर से लिया जाएगा।