उत्तरप्रदेश:पेट्रोल-डीजल नहीं अब ऐसे चलेंगी इलेक्ट्रिक व्हीकल गाड़ियां

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रिपोर्ट:-यूपी हेड कृष्ण कुमार शुक्ल

देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। जी हां, इसके लिए देश भर में ई-चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने की योजना है। केंद्र सरकार ने देश में ई वाहनों की जरूरत को समय पर समझते हुए इसके लिए तमाम कदम उठाए हैं और कार निर्माण सेक्टर को इस क्षेत्र में आगे आकर कार्य करने का माहौल प्रदान किया है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने और शून्य कार्बन उत्सर्जन और सतत विकास के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ईवी तकनीक दुनिया भर में आंखों को आकर्षित कर रही है। लेकिन देश में केवल ईवी वाहनों के आ जाने मात्र से इस लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती क्योंकि इसके अलावा देश भर में ई-चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाना बहुत जरूरी है।

चार्जिंग स्टेशनों की कमी ई-वाहनों की सबसे बड़ी समस्या

देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। जैसे-केंद्र सरकार व राज्य सरकारें ग्राहकों को इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर सब्सिडी मुहैया करा रही हैं। हालांकि इलेक्ट्रिक व्हीकल के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए बुनियादी संरचना का विकास सबसे जरूरी शर्त है। इसके लिए देश में सबसे पहले चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने की जरूरत है। अब कई निजी कंपनियां और सरकारी कंपनियां मिलकर इस दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। दरअसल, चार्जिंग स्टेशनों की कमी ई-वाहनों की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। यही कारण है कि लोग अभी ई वाहनों को अपनाने के बारे विचार करते हैं। यदि देश में चार्जिंग स्टेशनों की कमी को हल कर लिया जाए तो वाकयी ई व्हीकल की बिक्री में भी तेजी आएगी।

अल्टरनेटिव फ्यूल इन्फ्रास्ट्रक्चर डायरेक्टिव यानि यूरोपीय संघ में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति उपकरणों की तैनाती को विनियमित करने वाली प्रमुख नीति, यह अनिवार्य करती है कि सदस्य राज्यों को प्रति 10 EV पर 1 सार्वजनिक चार्जर का लक्ष्य रखना चाहिए। फिलहाल ‘ई-अमृत पोर्टल’ को इन आंकड़ों को देखते हुए अनुशंसित अनुपात को प्राप्त करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।

दिसंबर 2021 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 240% बढ़ी

जेएमके रिसर्च एंड एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है दिसंबर 2021 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण ने एक महीने में 50,000 यूनिट का आंकड़ा पार किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिसंबर 2021 में कुल ईवी बिक्री 50,866 इकाइयों की रही, जो दिसंबर 2020 में दर्ज की गई संख्या से 240 प्रतिशत अधिक रही। वहीं एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि दिसंबर 2020 में पूरे भारत में कुल 14,978 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए गए थे।

आने वाला दौर इलेक्ट्रिक वाहनों का

पूरी दुनिया में जिस तरीके से तमाम देशों के ऊपर कार्बन उत्सर्जन को कम करने की बड़ी जिम्मेदारी है इसी आधार पर एक बात तो साफ है कि आने वाला दौर इलेक्ट्रिक वाहनों का है। वर्तमान में पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों से की संख्या अधिक है। ऐसे में भारत का लक्ष्य निजी कारों में 30% और 70% EV बिक्री लेखांकन हासिल करना है। जी हां, यह बात हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कही थी। उन्होंने कहा था कि भारत जल्द ही दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब होगा। भारत का लक्ष्य है कि इस दशक के अंत तक सभी कमर्शियल कारों में 70 प्रतिशत, निजी कारों में 30 प्रतिशत, बसों में 40 प्रतिशत और दोपहिया और तिपहिया वाहनों में 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक व्हीकल हो जाएं।_

गौरतलब हो, भारत विश्व स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड पैदा करने वाला चौथा सबसे बड़ा उत्सर्जक है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में संपन्न हुए COP26 में, इसने वर्ष 2070 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक कम करने का संकल्प लिया है।

अगले 3-5 वर्षों में 22,000 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर सहमति

बता दें, देश में अगले 3-5 वर्षों में 22,000 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, ईवी में आसानी से स्विच करने के लिए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने मॉडल बिल्डिंग बायलॉज, 2016 में संशोधन किया है।_

ई-बाइक पर खर्च बहुत कम, घरेलू कनेक्शन से चार्जिंग संभव

ई व्हीकल में खर्च बहुत कम होता है क्योंकि यह घरेलू कनेक्शन पर भी चार्ज किया जा सकता है। ऐसे में इसके लिए चार्जिंग स्टेशन हेतु ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं। चूंकि दो पहिया वाहनों को लंबी दूरी के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता ऐसे में ई बाईक लोगों के लिए एक सस्ता विकल्प साबित हो सकता है।

इलेक्ट्रिक वाहन की मेंटेनेंस और रख रखाव में खर्च बेहद कम

जहां तक इलेक्ट्रिक वाहनों के मेंटेनेंस की बात है इसके रखरखाव में खर्च बेहद कम आता है। ऐसे में यह इन्हें अपनाने वालों के लिए सस्ता विकल्प बन सकता है। जबकि पेट्रोल और डीजल की कारों में समय-समय पर सर्विसिंग की जरूरत होती है जिसमें काफी खर्च आता है।

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