कलान APO दिलीप कुमार ने करोड़पति व्यापारियों को बनाया मनरेगा मजदूर,क्या है व्यापारियों के नाम ,प्रधानपुत्र राहुल वर्मा और कम्प्यूटर आपरेटर सोनू सिंह सहित एड़ीओ पंचायत की मिलीभगत से हुआ लाखो का घोटाला

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  • शाहजहांपुर(कलान)अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपने को दे कहावत कलान ब्लाक की मुख्य ग्राम पंचायत राफियाबाद कलान में देखने को मिल रहा है।जहां पर संविदा पर काम करने बाले APO व कम्प्यूटर आपरेटर की मिलीभगत से करोड़पति व्यापारियों को मनरेगा मजदूर बना दिया गया और वहीं वास्तविक मनरेगा मजदूर अपनी मजदूरी के लिए जिलाधिकारी के यहां चक्कर लगा रहे है।
    कलान ब्लाक की ग्राम पंचायत राफियाबाद कलान में
    वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा से लगभग 75 लाख रुपया का काम हुआ है।जिसमे 45 लाख रुपया पक्के काम का निकाला गया वहीं 29 लाख रुपया कच्चे काम अर्थात मनरेगा मजदूरी का निकाला गया।
    पप्पू के खेत से राम किशोर के खेत तक नाला खुदाई ,राम किशोर के खेत से ब्रजनाथ के खेत तक नाला खुदाई,बुधपाल के खेत से तोप सिंह के खेत तक नाला खुदाई,सत्यवीर के खेत से ओमेंद्र के खेत तक नाला खुदाई के नाम पर 13 लाख रुपया मनरेगा मजदूरी के नाम पर निकाला गया।यह सभी काम केवल नाम मात्र के लिए हुए है।
    इन कामो में जिन मनरेगा मजदूरों को मजदूरी दी गई वह कलान के करोड़पति व्यापारी है।
    कलान निवासी अमोल कुमार पुत्र सीलचंद्र कलान के सबसे बड़े रेडीमेड व्यापारी है और करोड़पति आदमी है।
    इनका मनरेगा जॉब कार्ड नंबर UP27-020-027-001/683 है ।यह वर्ष 2018 से मनरेगा मजदूर है।इसी प्रकार से अवधेश जिनके पिता स्व.हरद्वारी लाल कलान के जमींदार थे आज भी कलान के करोड़पति आदमी इनका जॉब कार्ड नंबर UP27-020-027-001/684 है।यह भी वर्ष 2018 से मनरेगा मजदूर है।इन दोनों लोगो ने वर्ष 2018 से अबतक 223 दिन मनरेगा मजदूरी की है।और मजदूरी के नाम पर दोनों लोगो 41751,41751 रुपया मिला।इनके साथ एक नाम और सामने आया है जिनका मनरेगा जॉब कार्ड नंबर नही मिल सका क्योकि इन लोगो के नाला खुदाई में सैकड़ो मस्टररोल बनाये थे।तीसरे व्यापारी कलान के जूता व्यापारी है जिनका सालाना टर्न ओवर लगभग 3 से 4 करोड़ का है।
    इनके अलावा वाराखुर्द के कुछ किसान विरादरी के लोगो के भी फर्जी मनरेगा कार्ड बनवा रखे है।यह लोग प्रधान पुत्र राहुल वर्मा के नजदीकी दोस्त है।
    जब मनरेगा मजदूर फर्जी है तो स्वाभाविक बात है कि मनरेगा द्वारा करवाये हुए काम भी फर्जी होंगे।
    सबसे खास बात यह है कि जिन मनरेगा मजदूरों ने वास्तव में काम किया था उनका पेमेंट नही किया गया तो इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
    ऐसा नही है कि इस घोटाले को बिना सरकारी कर्मचारियों के कर लिया गया हो।मनरेगा के पेमेंट की जिम्मेदारी APO की होती है यह संविदा कर्मी होते है जिनकी सेलरी लगभग 18 हजार होती है लेकिन APO के पास लक्जरी गाड़ी समेत हर सुविधा इनके पास मिलेगी।क्योकि यह लोग कमीशन के हिसाब के हिसाब से भुगतान करते है।
    पक्के काम पर 4% तथा कच्चे काम पर 1 % का कमीशन होता है।यदि केवल वित्तीय वर्ष 2020-21 की बात करे तो केवल इसी वित्तीय वर्ष में एपीओ ने कमीशन के नाम पर 17 लाख रुपया अवैध रूप से कमाया।इसके अलावा रोजगार सेवक ,वीडियो मनरेगा,का भी कमीशन बंधा होता है।इसी लिए इस प्रकार के फर्जीवाड़ा होते रहते है।जब शिकायत पहुंचती है तो जांच टीम भी घोटाले के हिसाब से अपना कमीशन लेकर जांच में लीपापोती कर देते है।

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