आइए दिखाते है किस तरह मेंथा और तिली में वाणिज्य कर विभाग की आंख में धूल झोंक कर होती है टैक्स चोरी

0
1267


**बाहर की फर्मों के सहारे तिली व मेंथा व्यापार में होती है करोड़ों के वाणिज्य कर की चोरी**
**मेंथा पर 12% तथा तिली पर होता है 5 ℅ वाणिज्य कर**
**वाणिज्य कर बचाने के लिए प्रति कुंतल के हिसाब से बाहर से मंगाते है कागज**
**मंडी सचिव की मिलीभगत से होता है यह गोरखधंधा**
**बाहर से प्रति कुंतल पर आने बाले कागजो ने खत्म कर दिए अधिकांश व्यापारियो के व्यापार**
**नगर के पांच युवा व्यापारी बने इस कागजी फर्जीवाड़ा के माफिया**
जलालाबाद। बाहर से प्रति कुंतल पर आये कागजो के सहारे नगर के कुछ युवा व्यापारियों ने अन्य व्यापारियों का व्यापार ही चौपट कर दिया।नगर के कुछ युवा व्यापारी मेंथा ऑयल तथा तिली दोनों का बड़े पैमाने पर काम करते है।तिली में 5 ℅ तथा मेंथा में 12 % वाणिज्य कर होता है।इस टैंक्स की चोरी के लिए यह लोग बाहर की फर्मो से प्रति कुंतल के हिसाब से कागज मंगवा लेते है ।
उदाहरण के तौर पर एक ट्रक में लगभग 250 कुंतल तिली भेजी जाती है ।जोकि 80 रु प्रति किलो के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 20 लाख बनती है।
इस ट्रक के कागज 60 रु प्रति कुंतल के हिसाब से 15 हजार रुपये में आ जाते है।जबकि इस पर 1.5% मंडी टैक्स लगभग 30 हजार तथा 5 ℅ वाणिज्य कर लगभग 1 लाख बनता है कुल मिलाकर 250 कुंतल पर 1 लाख 30 हजार टैक्स चुकाना पड़ता है।15 हजार में कागज मंगवा कर 1 लाख 15 हजार की टैक्स चोरी कर ली जाती है।15 हजार में मंडी सचिव सहित अन्य अधिकारी मैनेज और 1 लाख प्रति ट्रक की बचत माफिया किस्म के व्यापारियों को हो जाती है।
सूत्रों के अनुसार मंडी में इस समय 20 हजार कुंतल तिली आ चुकी है ।जिसमे लगभग 80 ट्रक बने जिनमे 80 लाख की केवल तिली में टैक्स चोरी किया गया है।
इसी प्रकार से कई अरब रुपये का मेंथा ऑयल का व्यापार इसी तरह से किया जाता है।मेंथा ऑयल पर 12 % वाणिज्य कर तथा 1.5 %मंडी टैक्स होता है।मेंथा ऑयल के बाहर से 3000 रु प्रति कुंतल के हिसाब से कागज आते है।मेंथा ऑयल का यदि नार्मल रेट 1000 रु प्रति किलो मान कर हिसाब लगाया जाय तो एक ड्रम(200 किलो) लगभग 2 लाख का होता है ।एक गाड़ी में 5 ड्रम जाते है तो 10 कुंतल माल भेजा गया तो इसके कागज का खर्चा 30 हजार रुपया आया।
अब यदि नियमानुसार बात की जाय तो 10 कुंतल मेंथा ऑयल की कीमत 10 लाख जिसपर 1.5% मंडी शुल्क 15 हजार तथा 12% वाणिज्य कर लगभग 1 लाख 20 हजार होता है कुल मिलाकर 1 लाख 35 हजार का खर्चा आता है लेकिन टैक्स चोरी कर माल भेजने पर मात्र 30 हजार का खर्चा आता है।केवल 5 ड्रम मेंथा ऑयल पर 1 लाख की बचत होती है।नगर में सीजन पर प्रतिदिन सैकड़ो ड्रम तेल खरीदा जाता है ।प्रति वर्ष अरबो रुपए का मेंथा ऑयल का व्यापार किया जाता है।जिसमे प्रतिवर्ष सरकार का कई करोड़ रुपया वाणिज्य कर चोरी किया जाता है।
ऐसा नही है कि इस खेल की जानकारी वाणिज्य कर विभाग को नही है।लेकिन बाहर से आये कागज एकदम एक नम्बर के होते है।इसी लिए इस खेल में होने बाले झोल को अधिकारी पकड़ नही पाते है ।और प्रति वर्ष वाणिज्य कर विभाग की टीम एकबार आती है और जांच के नाम पर मोटी रकम लेकर वापस चली जाती है।जब इसी खेल के जरिये करोड़ों कमाते है तो लाखों देने में कोई फर्क नही पड़ता है।
यदि मेंथा ऑयल का व्यापार एक अरब के ही मान लिया जाय तो प्रति वर्ष 12 करोड़ रुपया केवल वाणिज्य
टैक्स की चोरी से बचाया जाता है।अभी इसमे घटतौली व मिलावट खोरी शामिल नही है।इसी खेल के कारण मेंथा ऑयल की मंडी मंडी परिसर में नही ले जाई जाती है।

 

 

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here