धान खरीद:सरकार की सख्ती के बाद भी नहीं लग सकी बिचौलियों पर रोक

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रामनगर/बाराबंकी

रामनगर बाराबंकी किसानों की आमदनी दो गुनी करने के लिये प्रधानमंत्री मोदी व प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निरन्तर प्रयासरत है।लेकिन बाराबंकी जिले मे शासन प्रशासन की ओर से जारी सख्त दिशा निर्देश के बावजूद अधिकांश क्रय केन्द्रो पर विचौलियो की चांदी है।सूत्रों के अनुसार निर्धारित धान क्रय केन्द्रो पर जिम्मेदारो की ओर से हीला हवाली इसलिये हो रही है। जिससे परेशान होकर कृषक अपना धान विचौलियो के हाथ बेच देने पर मजबूर हो जाय।मालूम हो कि प्रदेश सरकार किसानो को आत्म निर्भर बनाने के लिये व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।लेकिन जिम्मेदार अधिकारियो की अनदेखी के कारण परेशान और व्यथित किसान मात्र 1000से ₹1200 प्रति कुंटल के बीच ही धान बेचने के लिये विवश है क्योंकि उसे अगली फसल बोने के लिए तथा दैनिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिये पैसे की नितांत आवश्यकता होती है।क्वार माह की नवरात्रि के साथ लालमती और सरबती जैसी अग्रिम धान की फसल जो पहले तैयार होती है।अच्छे दामो की ललक और जरुरत वश बिक्री करने का काम शुरु कर देता है।फिर करीब दो माह फसल आने की शुरुवात से व्ययतीत होने वाले है।बडी संख्या मे किसानो का धान विचौलियो के माध्यम से निजी क्रय केन्द्रो पर पहुँच चुका है।एक तरफ सरकार की प्राथमिकता लघु एंव सीमान्त किसानो को समर्थन मूल्य का लाभ दिलाना है।तो दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियो की खाऊ कमाऊ नीति के कारण किसान घुट घुट कर जीने पर विवश है।यह बात अलग है विगत वर्ष से सबक न लेते हुये पहले से तैयारी ना होने के कारण सरकार की मंशा फलीभूत नही हो रही है।गौरतलब बात तो यह है कि इस बार भी भाजपा किसान मोर्चा की ओर से भी विचौलियो के खिलाफ आवाज उठाई गयी।यहा पर जागरुक जनो से सवाल इस बात का है कि किसानो के जीवन यापन के लिये खेती एक मात्र सहारा है।और पैदा हुआ अनाज ही उसका मूलधन होता है। जिसे वह बेच कर के अपने परिवार का भरण पोषण करता है।अब पैदा हुये अनाज की खरीददारी समय से न होने के कारण उसे अन्य दुकानदारों के यहां कम पूंजी में ही बेचकर कर धैर्य रखना पड़ रहा है।किसान के कठिन परिश्रम से उत्पन्न हुआ अनाज बिक्री करने के बाद कुछ पैसों में ही सिमट कर रह जा रहा है।संवाददाता की ओर से तहसील रामनगर के क्षेत्र मे भ्रमण करने पर गणेशपुर निवासी पूरन, रामदेव, मीतपुर निवासी रामकिड़ियावन, भैरमपुर निवासी राजाराम ,रामनगर निवासी सर्वेश कुमार के अतिरिक्त क्षेत्र के अन्य किसानों ने बताया कि आवारा पशु धान को चर न जाए इसलिए रात दिन खेतों में लेट कर धान को बचा पाये। इसके अतिरिक्त बाढ़ के कारण ज्यादातर धान की खेती नष्ट हो गई कुछ जो बची है उसकी कीमत भी हम लोगों को अच्छी नहीं मिल पा रही है। पिछले वर्ष भी धान बेचने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा इस वर्ष भी स्थिति अच्छी नहीं दिख रही है।खैर यह तो मात्र बानगी भर है।चिंता का विषय यह है कि अन्नदाता द्वारा पसीना बहाकर कृषि प्रधान देश मे उत्पन्न की गई फसल को सरकार समय से खरीद कर उचित दाम दे पाएगी या कम कीमत पर ही धान को भेजकर अन्नदाता को सबूरी करना पड़ेगा।ऐसी स्थिती मे जागरुक किसान प्रदेश सरकार के मुखिया से आस की उम्मीद लगाये बैठा है।

रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल/विवेक शुक्ल

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