बाराबंकी:महादेवा महोत्सव अगहनी मेले की अनदेखी कर रहे आला अधिकारी सरकार बेखबर

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रिपोर्ट:-कृष्ण कुमार/विवेक शुक्ल

उत्तरप्रदेश के जनपद बाराबंकी के रामनगर तहसील के अंतर्गत महादेवा के ग्राम सभा लोधौरा मे स्थित पौराणिक शिवलिंग लोधेस्वर धाम है। भाजपा सरकार होते हुवे भी  इस धार्मिक स्थल का विकास अधूरा है।अधिकारियों की मनमानी के चलते ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजे हुए लोधेश्वर महादेवा के अगहनी महोत्सव की धूमधाम और अमित पहचान धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है। मंदिर के रिसीवर और तहसील क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी भोलेनाथ के दरबार के प्रति परंपरा के निर्वहन तक की जिम्मेदारी निभाए जाने से गुरेज कर रहे हैं।यह हाल तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी पद आसीन होने के बाद यहां दो बार आ चुके हैं और यहां के चौमुखी विकास कार्यों के प्रति निरंतर समर्पित है आपको बता दे कि लोधेश्वर महादेवा के अगहनी मेले में बहुत बड़ा मेला लगता था मेले में हुक्का कालीन खद्दर तथा ऊनी वस्त्रों की बड़ी-बड़ी दुकानें दूरदराज बड़े बड़े शहरों से आती थी मेले में भीड़ का आलम यह रहता था कि बच्चे बूढ़े जवान बिना एक दूजे से टकराई दो कदम भी आगे बढ़ नहीं पाते थे खैर देश प्रदेश के व्यवसाई जमीन के मालिकाना और प्रशासनिक लूट से धीरे-धीरे यहां से दूर होते चले गए विगत के समय में तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश्वर रामेश्वर के बेहतरीन प्रयासों से एक बार मेले को पुराना आकार तो जरूर हुआ लेकिन उनके चले जाने के बाद लोधेश्वर महादेवा के प्रति जिम्मेदार अधिकारियों का कोई लगाव नहीं देखा जा सकता वर्तमान समय में कई वर्षों से जमे जिला अधिकारी डॉक्टर आदर्श सिंह के समय में लोधेश्वर महादेवा की पावन धरा घोर उपेक्षा का शिकार है आम जनमानस में आज यह चर्चा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अब क्षेत्रीय विधायक शरद कुमार अवस्थी और सांसद उपेंद्र सिंह रावत के होते हुए पूजा-पाठ और संस्कृत महोत्सव की परंपरा में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। तब यहां के प्रति आस्थावान शिव भक्तों की ओर से सवाल उठना लाजमी है बताते चलें अगहन पक्ष की अगहन माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को देश प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से भारी संख्या में शिव यहां प्रतिवर्ष आते थे आते रहे हैं यह मेला करीब-करीब माह भर चलता था। सांस्कृतिक महोत्सव भी 1 सप्ताह तक धूम मचाए रहता था चलिए भैया देश प्रदेश के नाम और कलाकार कवि शायर यहां अपनी उपस्थिति आमंत्रण से दर्ज कराते रहें है। इस बार अभी तक तैयारी बैठक नहीं हो सकी जिसके चलते आम जनमानस में रोष व्याप्त है। रामनगर तहसील के अधिकारियों के प्रति सवाल उठ रहे हैं।

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