रामनगर में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालुओं ने की सुख समृद्धि की कामना

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रामनगर/बाराबंकी

छठ पूजा भगवान भास्कर की उपासना के रूप में मनाया जाता है। मूलतः सूर्य सष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहां गया पारिवारिक सुख समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति हेतु ही पर्व को मनाया जाता है। पुरुष और स्त्री दोनों ही इसे समान रूप से मनाते हैं छठ व्रत के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं।उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाठ जुए में हार गए थे। तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था।और मनोकामना पूर्ण हुई थी। तथा पांडवों को राजपाठ वापस मिल गया था।लोग परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठ मैया का संबंध भाई बहन का है। लोकमत की पहली पूजा छठ सूर्य ने ही की थी। हालांकि बिहार और उत्तर प्रदेश के इलाकों में मनाया जाता है।प्रकृति और मनुष्य के साथ अनादि काल से चलता चला आया है।छठ पर्व इसी का प्रतीक है।जहां प्राकृत का अंत होकर मनुष्य इस त्यौहार को मनाता है।छठ का ऐसा त्यौहार है।जिसमें मंत्र परंपराएं हैं।यहां मंत्र छठ के गीत हैं।जो मानव के उत्सव धर्मी स्वभाव को प्रदर्शित करते हैं।यह महापर्व बिहारी लोगों के साथ साथ पूर्वांचल समेत संपूर्ण भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।इसी क्रम में तपेसिपा, पुरैना, डीपो, चांदामऊ रामनगर बाराबंकी सहित विभिन्न इलाकों में आस्था के लोकपर्व छठ के तीसरे दिन विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा घर की छतों और आवासीय प्रांगण में बनाए गए कुंड में हजारो की संख्या में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देने सैलाब उमड़ पड़ा आज बुधवार को व्रत धारियों ने डूबते सूर्य को अर्ध्य देकर छठ पूजा घाट को रंग रोगन व बिजली की रोशनी से सजाया और फल फूल और मिष्ठान का भोग लगाकर भगवान भास्कर से मनोवांछित फल की कामना की।

रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल/विवेक शुक्ल

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