बाराबंकी:गनेशपुर की ऐतिहासिक रामलीला बहरामघाट में सदियों से स्थानीय कलाकारों द्वारा की जा रही है।

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गनेशपुर की ऐतिहासिक रामलीला
गणेशपुर बहरामघाट के स्थानीय कलाकारों के द्वारा एक सदी से चल रही है रचनात्मक सुंदर रामलीला

गनेशपुर/बाराबंकी
उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जनपद की तहसील रामनगर के अंतर्गत गनेशपुर बहरामघाट में रामलीला भवन के पास जिले का शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र डायट,व बैंक ऑफ इंडिया ,रानी कोठी घाघरा नदी के किनारे स्थित गनेशपुर में वर्षो से भव्य रामलीला का आयोजन श्री राम भक्तो द्वारा निरंतर किया जा रहा है,यहाँ की रामलीला रात्रि के समय मे होती है,यहाँ विधिवत रामायण के अनुसार कलाकार बोलकर पाठ करते है,यहाँ की रामलीला में राम, सीता,लक्ष्मण,भरत, शत्रुध्न और रावण का पाठ ब्राम्हण पुत्रो के द्वारा किया जाता है।यहां की मुख्य बात यह है कि कलाकार निःशुल्क रामलीला में भागीदारी करते है।आपको बता दे बाराबंकी में व्यापार के लिये मशहूर गनेशपुर बहरामघाट में विगत वर्ष की भांति इस वर्ष रामलीला का सुभारम्भ 8 अक्टूबर को गणेश पूंजन करके शुरू किया गया,और रामलीला 22 अक्टूबर तक राज्याभिषेक तक चलती है।रामलीला कमेटी के वरिष्ठ डायरेक्टर जितेंद्र नाथ मिश्र ने बताया प्रत्येक वर्ष की तरह समाज शिक्षा केन्द्र गनेशपुर में ऐतिहासिक रामलीला स्थानीय कलाकारों द्वारा की जाती है। रामलीला सांयकालीन 7 बजे से प्रारंभ होकर देर रात्रि तक होती रहती है।गनेशपुर की ऐतिहासिक रामलीला बहरामघाट के स्थानीय कलाकारों द्वारा बढ़ चढ़कर युवकों बच्चों द्वारा सुंदर कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है।गनेशपुर की रामलीला 15 दिनों तक लगातार सबके सहयोग से चलती रहती है।
आपको बता दे रामलीला के कलाकारों द्वारा गनेशपुर रामलीला में गणेश पूजन करके रामायण का पाठ प्रतिदिन एक घंटा किया जाता है। तत्पश्चात, प्रतिदिन की रामलीला कलाकारों द्वारा की जाती है।
सर्वप्रथम गणेश पूजन उसके बाद नारद मोह,रावण जन्म,राम जन्म,सीता जन्म,ताड़का वध,नगर फुलवारी,धनुष यज्ञ सीता स्वयंवर,सूर्पनखा की नाक काटना, सीता हरण लंका दहन,लक्ष्मण सक्ति, कुंभकर्ण वध,मेघनाथ वध,रावण वध के बाद दसहरा भी मनाया जाता है।इसके बाद एक दिन नाटक खेला जाता है,उसके अगले दिन भरत मिलाप होता है। और राजसिंहासन गद्दी का कार्यक्रम करके लवकुश लीला कर एक दिन नृत्य नाटक व राजा हरिश्चंद्र नाट्य किया जाता है।
सम्पूर्ण रामलीला करने के बाद रामलीला के कलाकारों को सम्मान पूर्वक विदाई करके विदा किया जाता है।
आपको बता दे गनेशपुर की ऐतिहासिक रामलीला 100 वर्षो से लगातार चल रही है।सैकड़ो गाँव के लोग गनेशपुर की रामलीला देखने आते है।रामलीला में पुराने कलाकार आज भी चर्चित है।जिनकी कलाकारी मन मोह लेती है।पुराने कलाकारों में स्वर्गीय सूर्यभान शुक्ल,हरिशंकर त्रिवेदी,वरिष्ठ कलाकार रामकुमार गुप्ता, रामलीला संरक्षक रामकुमार पाठक,राजकुमार निगम,बलराम गुप्ता, शिवराम गुप्ता, दीपू अवस्थी,चंद्रप्रकाश मिश्र,रामशंकर सोनी,राजेश मिश्रा,अमित गुप्ता,रामकुमार शुक्ल,अश्वनी पाण्डेय,आशीष शुक्ल,आशीष त्रिवेदी, आदि कलाकारों द्वारा गनेशपुर की ऐतिहासिक रामलीला में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
रिपोर्ट:कृष्ण कुमार शुक्ल

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