महादेवा का राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय बना जर्जर प्रशासन मौन

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रिपोर्ट-राघवेन्द्र मिश्रा/विवेक शुक्ल @Narad Samvad
उत्तरप्रदेश के जनपद बाराबंकी की तहसील के अंतर्गत रामनगर महादेवा सूरतगंज का मामला सामने आया है।जहां पुराने प्रशासनिक बने जर्जर भवन दे रहे किसी बड़ी घटना को दावत प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारी बने अनजान होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से उपचार करने वाला चिकित्सालय खुद बीमार।योगी सरकार करोड़ों खर्च कर डिजिटल इंडिया प्रदूषण मुक्त सौंदर्यीकरण बनाने में लगी है वहीं दूसरी तरफ उनके कामयाबी पर लगातार पानी फेर रहे हैं।पूरा मामला रामनगर तहसील के अंतर्गत विकासखंड सूरतगंज के ग्राम पंचायत लोधौरा महादेवा का है जहां बने अति जर्जर भवन में राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय चल रहा है।भवन की फर्श उखडी है अंदर छत का प्लास्टर भी उखड़ा हुआ है।खिड़कियां व दरवाजे भी कमजोर है बताते चलें कि महादेवा में लगभग 12 वर्षों से अधिक समय से राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित है जिसके तहत इस क्षेत्र के कई गाँवों को इसका लाभ मिल रहा है। प्रतिदिन लगभग चर्म रोग,उदर रोग,सहित अन्य बीमारियों से पीडित 50 से अधिक मरीज चिकित्सालय में उपचार हेतु आते हैं ,जहां पर मरीजों को दवा से फायदा भी होता है यहां पर चिकित्सक फार्मेसिस्ट वार्ड बॉय सहित तीन लोगों का स्टाफ कार्य करता है लेकिन भवन का निर्माण अभी तक नहीं हो सका वर्तमान में राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय जिस भवन में चल रहा है वह तीन दशक पहले के बने सामुदायिक भवन में है जो कि बहुत ही जर्जर अवस्था में है लोधेश्वर तीर्थ नगरी में यह अस्पताल संचालित है क्षेत्रीय जनों के साथ साथ दूर क्षेत्रों से आए हुए श्रद्धालुओं को भी चिकित्सा सहायता का लाभ पहुंचता है अस्पताल के सामने बने शौचालय बड़े ही जर्जर दशा में है घास फूस झाडियाँ उगी हुई है महादेवा में तैनात सफाई कर्मचारी व ब्लॉक प्रशासन की उदासीनता के चलते शौचालय भी अव्यवस्था का शिकार है इस संबंध में जब क्षेत्रीय सचिव जयप्रकाश से संपर्क करने की कोशिश की गई तो फोन नहीं मिला बताते चलें कि सूबे के मुखिया हाल ही में बाराबंकी के जीआईसी मैदान में जब आए तो उन्होंने अपने भाषण में कई बार महादेवा का जिक्र किया पूर्व में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महादेवा में दो बार आगमन हो चुका है। जिससे महादेवा के विकास के लिए मुख्यमंत्री की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन ब्लॉक से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों पर कोई भी असर नहीं पड़ता है। क्षेत्रीय जनों का मानना है कि यदि इस भवन का कायाकल्प ही करा दिया जाए तो इस में चल रहे अस्पताल के स्टॉफ व मरीजों को कुछ राहत महसूस हो भवन के सामने बने शौचालय का भी मरम्मतीकरण कायाकल्प हो जाए तो होम्योपैथिक चिकित्सालय में तैनात कर्मचारियों सहित आए हुए मरीजों के लिए भी इसकी उपयोगिता सिद्ध हो अब देखना यह है संज्ञान में आने के बाद इस पर कितना कार्य होता है।

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