अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर बुर्जुगों के अधिकारों के बारे में दी जानकारी

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रिपोर्ट-विकास सिंह narad samvad

पीलीभीत मरौरी के पिपरिया अगरू प्राइमरी स्कूल में शुक्रवार को मनाया गया अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस प्रधानाध्यापक सय्यदा ने बच्चों को बताया कि प्रत्येक वर्ष ‘1 अक्टूबर’ को ये दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर अपने वरिष्‍ठ नागरिकों का सम्मान करने एवं उनके सम्बन्ध में चिंतन करना आवश्यक होता है। आज का वृद्ध समाज अत्यधिक कुंठा ग्रस्त है और सामान्यत: इस बात से सर्बाधिक दु:खी है कि जीवन का विशद अनुभव होने के बावजूद कोई उनकी राय न तो लेना चाहता है और न ही उनकी राय को महत्व ही देता है। इस प्रकार अपने को समाज में एक तरह से निष्प्रयोज्य समझे जाने के कारण हमारा वृद्ध समाज सर्बाधिक दु:खी रहता है। वृद्ध समाज को इस दुःख और संत्रास से छुटकारा दिलाना आज की सबसे बड़ी जरुरत है। इस दिशा में ठोस प्रयास किये जाने की बहुत आवश्यकता है।हमें सदीव अपने बुजुर्गों के साथ समय बिताना चाहिए, उनके मन की बात को सुनना व समझना चाहिए। विद्यालय में बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से लघुकथा कथा भी दिखाई गई।। छात्र – छात्राओं तथा अध्यापकों द्वारा बुज़ुर्गों की रक्षा एवं सम्मान की शपथ भी ली गयी। छात्रों द्वारा बुज़ुर्गों का आशीर्वाद भी लिया गया।
अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के मौके पर एक अक्टूबर को प्राइमरी स्कूल में शपथ दिलाई गई कि वे अपने घर, अपने आसपास रहने वाले बुजुर्गों के प्रति सहयोगात्मक रवैया रखेंगे।
प्रधानाध्यापक ने बताया कि बच्चों में बुजुर्गों की देखरेख की भावना जगाने और उनका सहयोग करने के लिए बचपन से ही तैयार करना चाहिए।अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर बुर्जुगों के अधिकारों के बारे में
प्रधानाध्यापक सय्यदा ने बताया कि ये दिन संसार में वृद्धों की दुख-तकलीफों के बारे में लोगों को जागरुक करवाने के लिए मनाया जाता है, वहीं ये दिवस देश में साल 1990 से लगातार मनाया जा रहा है।
इस अवसर पर अनोखे लाल, सीताराम जी, प्रेमपाल, लज्जो देवी एवं अन्य अभिभावक मौजूद रहे, सरिता मिश्रा का विशेष सहयोग रहा, अभिषेक सक्सेना,सत्यदेव शाक्य पल्लवी सामंत आदि मौजूद रहे

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