बाराबंकी:रामनगर- तराई क्षेत्र के गांवों में सरकारी योजनाओं में हो रही जमकर बंदरबांट

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रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल

रामनगर बाराबंकी प्रदेश सरकार की ओर से जनहित मे जारी होने वाले दिशा निर्देश और ढेर सारी योजनाये तहसील रामनगर के क्षेत्र मे कोई मायने नही रखती है।बरसात के मौसम मे विद्मुत आपूर्ति अधिकतर बाधित रहती है अब मिट्टी के तेल के वितरण से अंधिकाश गांवो वंचित रहने के कारण लोग एक दीपक जलाने के लिये तरस रहे है।लेकिन जिम्मेदार अधिकारियो की गांधारी नजरो से यह सब कुछ ओझल है।राशन वितरण कार्य मे कोटेदारो की ओर से की जा रही घटततौली तमाम आवाजे उठने के बावजूद आमजनो को राहत मिलती हुई नही देखी गयी।जागरुक जन प्रदेश सरकार के मुखिया आदित्य नाथ योगी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से चलायी जा रही जीरो टांलरेश नीति का लगातार मखौल उडाने और ठीक विपरीत कार्य करने वाले महाभ्रष्ट अधिकारियो के ऊपर निगाह रखने की मांग की है।मालूम हो कि तहसील रामनगर के क्षेत्र मे एक हिस्सा घाघरा नदी के तराई क्षेत्र मे आता है।बरसात के मौसम नदी का जलस्तर बढने से सैकडो गाव बाढ की विभीषिका से शिकार बनते है।इसलिये सरकार हर समभव सहायता देकर बाढ पीडितो की पीडा को कम करने का भरसक प्रयास करती है।लेकिन कई वर्षो से तैनात सप्लाई इंस्पेक्टर प्रभाष त्रिपाठी के क्षेत्र मे गरीबो के राशन मे घटतौली की गंभीर शिकायते लगातार उठती रही है।अब साठ गाठ के चलते उठने वाली आवाजे दबाई जाती रही है।वर्तमान मे बरसात का मौसम चल रहा है।तराई क्षेत्र मे विद्मुत आपूर्ति आये दिन तार खंभे और डालो के गिर जाने से लगातार बाधित बनी रहती है।क्षेत्र के अधिकतर गांवो मे शायद ही किसी गांव मे मिट्टी के तेल का वितरण किया जाता हो।लोग डीजल और चार्जिग वाले उपकरणो को जलाकर किसी तरह काम चला रहे है मगर यहा पर भी विद्मुत की आपूर्ति आडे आ जाती है।क्षेत्र के तमाम कोटेदार आज कल मिट्टी के तेल की अति आवश्यकता के मद्देनजर ग्रामीणो को मिट्टी के तेल की आमद बंद होने की बात कहकर समझा देते है।समाज सेवियो ने करीब दो दर्जन से अधिक गांवो का भ्रमण किया तो सबसे अधिक जरुरत मिट्टी के तेल की बरसात के मौसम मे मालूम हुई।अब यह समस्या तराई क्षेत्र के गांवो मे एक बडे पीडा के रुप मे सुनाई पड रही थी।उसमे भी मिट्टी के तेल का वितरण न होने की कुछ गावो के बाढ पीडितो से जानकारी मिली।वैश्विक महामारी के दौर मे अब मामला चाहे फ्री अथवा नियमित राशन वितरण का हो घटतौली सब पर भारी साबित हुई।वितरण न करने अथवा आधा अधूरा मिलने की जानकारी मिली हो मगर लोगो से जब शिकायत व्यक्त करने की बात कही गयी तो वह लोग भडक कर बोल कोई सुनने वाला है।जागरुक जनो मे सवाल तो इस बात का भी था कि क्या तैनात इंस्पेक्टर प्रभाष त्रिपाठी के रहने के दौरान शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोग अपने कर्तव्यो से निरन्तर दूरी बनाकर चाशनी का भोग लगाकर आखे मूदे हुये है शिकायत किससे करे जब बडे विभागीय अधिकारी उन्हे भाजपा शासन की शुरुवात से ही यहा उन्हे कमाऊ पूत के रुप मे तैनात किये हुये है।खैर यह तो मात्र एक विभाग की मात्र बानगी भर है।

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तहसील रामनगर बहरामघाट क्षेत्र के दर्जनों गांव हर वर्ष घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर बढ़ने डूब जाते है ,सरकार की तरफ से कई योजना आती है जिसमे कुछ गांवों को किसी तरह से लेखपाल की पैरवी करके योजना का लाभ मिलता है ,और कुछ गांवों को यह कह दिया जाता है कि यह गावँ बाढ़ क्षेत्र में नहीं आता आपको बता दें सभी गांव के किसानों की पूरी तरह से बाढ़ से फसल बर्बाद हो जाती है और लेखपाल यह रिपोर्ट लगाता है कि ये गांव बाढ़ में नही आते।
नेपाल द्वारा पानी छोड़ने से घाघरा का जलस्तर बढ़ गया है किसानों की फसल बर्बाद होने के कगार पर खड़ी है।उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, लेखपाल क्या करेंगे।
आपको बता दे किसान क्रेडिट कार्ड से फसल बीमा का पैसा काट लिया जाता है लेकिन फसल नष्ट होने पर किसान को बीमा का लाभ नही मिलता तो किसान बैंककर्मी से पूछता है तो बैंक मैनेजर कहते है लेखपाल की रिपोर्ट चाहिए।
अब देखना यह होगा कि यूपी की योगी सरकार
कितनी खरी उतरेगी और किसानों को योजना का लाभ मिल पायेगा या नही।

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