बाराबंकी:रामनगर बारिश की मार से किसानों की मेंथा की फसल नष्ट होने के कगार पर

0
846

रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल/संपादक/नारद संवाद

बारिश होने के बाद किसान अपनी मेंथा की फसल देखता हुआ।

रामनगर/बाराबंकी

रामनगर बाराबंकी के किसानो की पीडा थमने का नाम नही ले रही है।मौसम की मार से किसान व्यथित है।मौसम की मार से मेथा की फसल बरबाद होने के नजदीक पहुँच चुकी है।डीजल और खाद की महगाई का भी रोना है।एक तरफ कोरोना वायरस से सतर्कता के मद्देनजर शासन की ओर से बचाव के लिये जारी हुये दिशा निर्देश खेती किसानी से समबंधित कार्य को पूरी तरह से प्रभावित कर रहे है।तो दूसरी तरफ बे मौसम की पानी की मार से मेथा की फसल नष्ट हो जाने के का खतरा किसानो के सिर चढकर बोल रहा है।वही रामनगर लोहटीजई के किसान आनंद कुमार शुक्ला ,विष्णु कुमार का कहना है बरसात से लगभग 20 बीघा मेंथा की फसल लगी है इस पानी की मार से मेंथा की फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है,  दूसरी तरफ अगर मेंथा की फसल बच गई तो इसका रेट व्यापारी सेट करते हैं सरकार से कोई लेना देना है ही नहीं सरकार को मेंथा की फसल का रेट तय करना चाहिए जिससे किसानों को नुकसान का सामना ना करना पड़े और अच्छा मुनाफा मिले योगी मोदी किसानों के लिए तो बहुत कुछ बोलते हैं लेकिन मेंथा की फसल पर कुछ भी नहीं बोलते ।
व्यथित किसान नगदी फसलो से जैसे मेथा ,ताईवानी तरबूज आदि के पर लाकडाऊन के साथ बेमौसम बरसात से करारा आघात लग गया।निरन्तर बदल रहे मौसम के कारण मेथा की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।कोरोना वायरस की महामारी के दौर मे किसानो की समस्याये निरन्तर बढती रही है।कोई विशेष राहत किसानो को मिलती हुई दिखाई नही पड रही है।अभी तक किसान असहाय होते हुये लागत और उसमे भी घाटे का सौदा कर रहा है।किसानो को के .सी .सी .के रुप मे जो ऋण दिया जाता है जिस पर बैंके फसलो के बीमा के नाम पर बार बार धन ऋण मे जोडकर जमा कराती है उसका भी लाभ राजस्व विभाग के सहारे है।कोरोना वायरस के चलते बीमा कम्पनिया पूर्व के समय मे सर्वे करने से अपनी असमर्थता व्यक्त कर चुकी है।दूसरी तरफ राजस्व प्रशासन क्या करे क्या न करे।सभी को महामारी से बचाये जाने का कार्य ही सबसे पहले सर्वोपरि है।जिन किसानो की क्षति अधिक हुई है अधिकतर किसान चाहे बीघे दो बीघे ही मेथा की खेती किये है करीब करीब छोटे बडे सभी किसानो के पास मेथा की खेती है मौसम की मार के प्रभाव से कोई बचता हुआ नही दिखाई पड रहा है।क्षेत्रीय कृषक फसलो की कटाई कर आगामी फसलो के लिये जी जान से सतर्क रहकर जुटे हुये है लेकिन मौसम की बेरुखी अब किसानो को बेहाल कर रही है।कुछ भी हो अन्नदाताओ की घोर पीडा थमने का नाम नही ले रही है।लेकिन विषम परिस्थियो मे रहकर भी देश के हित मे लाक डाउन के निर्देशो का पालन करने मे भी किसान अग्रिम पंक्ति मे सबसे आगे खडा हुआ है।आगे जो होगा वह देखा जायेगा।

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here