*बाराबंकी: लोधेश्वर धाम महादेवा में लाखों श्रद्धालुओं ने किया पूजन अर्चन लगाए बोल बम के नारे*

0
222

 

संपादक कृष्ण कुमार शुक्ल नारद संवाद बाराबंकी/उत्तरप्रदेश लोधेश्वर धाम महादेवा बाराबंकी महाशिवरात्रि पर विशेष लेख G

 

 

 

रामनगर बाराबंकी।
ऋषि मुनियों देवताओं व शिष्यों द्वारा बहुप्रतीक्षित पावन कल्याणकारी महाशिवरात्रि की शुभ तिथि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी दिन गुरुवार को लोधेश्वर महादेव जी के धाम महादेवा में लाखों शिवभक्त कांवरियों ने जलाभिषेक किया।परमात्मा शिव जी एवं परमेश्वरी पार्वती जी के शुभविवाह की इस तिथि को धरती आकाश हर कहीं महा महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।व्रत उपवास कथा कीर्तन अभिषेक पारंपरिक गीत एवं रात्रि की विशेष पूजा आदि शुभकर्म धरा पर आदिकाल से होते आए हैं किंतु बाराबंकी की धरती महादेवा में महाशिवरात्रि पर्व का एक अलग रूप देखने को मिलता है। सैकड़ों किमी लंबी दूरी तय कर के धाम में आने वाले कांवरिए केसरीपुर क्रासिंग को देखते ही थकान खोने लगते हैं बाणहन्या जलधारा में स्नान कर कतार में लगकर मठ में प्रवेश करते हैं लोधेश्वर का गंगाजल से अभिषेक कर धन्य प्रसन्न मुद्रा को प्राप्त होते हैं।वापसी में खरीदारी कर घर लौटते समय मेला क्षेत्र से लेकर बुढ़वल चौराहे तक क्षेत्रीय शिवभक्तों द्वारा सजाए गए भोजन प्रसाद के पांडलो पर भी आयोजकों का आग्रह स्वीकार कर सेवा का अवसर देते हैं।मेले में लगातार बढ़ती भक्तों की संख्या को देखते हुए प्रशासन सतर्क रहा क्षेत्र के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे पड़ोसी थानों व जिलों से ड्यूटी पर आए पुलिसकर्मी अपने अपने स्थानों पर मुस्तैद दिखे।पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने दोपहर को मेले में पहुंचकर की शिव जी का जलाभिषेक किया व सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को संबंधित निर्देश दिए।कुंतेस्वर सिद्धेश्वर औसानेस्वर नर्मदेश्वर जंगलेस्वर नीमेस्वर बालेश्वर आदि नामों से जनपद में पूजित प्रतिष्ठित भोलेनाथ महादेवा धाम में लोधेश्वर के नाम से विख्यात हैं।इन्हीं की कृपा से फाल्गुनी कांवरिया मेला २०२१सकुशल पूर्ण हुआ।रामनगर तहसील क्षेत्र के सभी कस्बों वा गांवों में शिवपार्वती के महामिलन की अलौकिक बेला को सभी नगर वासियों व ग्रामीणों ने पूरे श्रद्धाभाव से कई प्रहर पूजा की शिवालयों में रात्रि पर्यंत विवाह की मंगल परंपराएं पूर्ण की गई व ढोलक की थाप पर कर्णप्रिय मधुर लोकगीत गाए गए भक्तों ने दिनरात का अंतर भुला कर इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here