बाराबंकी:9 दिवसीय रामपुर महोत्सव मेले का होगा भव्य आयोजन

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रिपोर्ट:एडिटर कृष्ण कुमार शुक्ल मसौली बाराबंकी। ऋषियो , मुनियों की तपोस्थली की रूप में जाने जाना वाला बाराबंकी जनपद कौमी एकता का प्रतीक माना जाता है। देवा-महादेवा की इस पवित्र धरती पर 5 सौ वर्ष पूर्व एक ऐसे भी सन्त रहे जो हवा के तेज बवंडर में विलुप्त होकर ईश्वर के पास चले गये। ऐसे महान अवतारी सन्त रमता राम चतुर्भुजी त्रिकलांग की तपोस्थली रामपुर धाम (जहांगीराबाद) में प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से लगने वाले 9 दिवसीय मेले में भक्तो की गूंज शुरू हो गयी हैं।हवा के तेज बवंडर के बीच से विलुप्त होने वाले अवतारी त्रिकालग संत रमता राम चतुर्भुजी स्वामी जी रामपुर जहांगीराबाद आश्रम लाखो भक्तो का श्रद्धा का केन्द्र है। सद्गुगुरु सन्त कबीर, सन्त नामदेव,दादू दयाल साहिब,सिरोमणि सन्त रैदास जी,गुरु गोरखनाथ जी को अपना आदर्श मानने वाले त्रिकालग सन्त रमता राम चतुर्भुजी स्वामी का रामपुरधाम 5 सौ वर्ष से अधिक पुराना आश्रम है। एक ही ईश्वर का संदेश देने वाले स्वामी जी प्रथम श्रेणी के एक बहुत बड़े उच्च कोटि के अवतारी सन्त थे। स्वामी जी के जन्मस्थान एव जन्मतिथि के बारे में तो कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। परन्तु किंवदंतियों के अनुसार पाँच सौ वर्ष पूर्व यह क्षेत्र बांस का घना जंगल हुआ करता था काफी दूरी तक कोई भी आबादी नहीं थी जंगल से लगभग 5 किलोमीटर दूर ग्राम चेचरूवा व निगरी गांव थे। उक्त भयानक जंगल के बीच से ही नैमिशारण्य से अयोध्या जाने के लिए पैदल का रास्ता था और साधु संत इसी रास्ते से तीर्थ यात्रा करते रहते थे। इसी से अंदाजा लगाया जाता है कि स्वामी जी इसी रास्ते से गुजरे होंगे और ब्रहा दर्शन की भावना के चलते इस एकान्त बांस के वन को अपनी तपोस्थली बना ली और एक गुफा में रहने लगे।

      स्वामी जी के प्रथम दर्शन ग्राम निगरी निवासी चरवाहे ओरी अहीर को हुए थे जो प्रतिदिन अपने पशुओं को जंगल के किनारे चराने ले जाता था जिसमें एक बहला भैंस( बगैर बच्चा दिये) थी जो एक दिन चरते चरते घोर जंगल में पहुंच गई और स्वामी जी जिस स्थान पर रहते थे उसी के निकट एक तालाब से नहाकर जब भैंस निकली तो स्वामी जी को दूध पीने की इच्छा हुई किन्तु थनों को देखकर प्रतीत लगाया कि यह तो भैंस बहला है और अपनी इच्छा को रोक लिया परन्तु एकाएक भैंस के थन में दूध आ गया और टपकने लगा जिस पर स्वामी जी ने अपना कमण्डल थनों के नीचे रख दिया और कमण्डल दूध से भर गया।

      तब से नित्य भैंस अपने झुंड से अचानक गायब हो जाती और शाम को वापस आ जाती एक दिन चरवाहे ओरी ने देखा की भैंस के थनों में तनाव है और दूध टपक रहा है तो दूसरे दिन चरवाहे ने पूरा ध्यान उसी भैंस पर रखा जब भैंस जंगल में जाने लगी तो दूम पकड़ कर चरवाहा भी जंगल में घुस गया जंगल के बीच पहुंचकर चरवाहे ने देखा एक चबूतरा बना है और निकट ही एक तालाब (सरोवर )है और भीनी भीनी सुगंध आ रही है। इतने में स्वामी जी बाहर निकले और भैंस के थनों के नीचे कमंडल रख दिया और थनों से दूध निकलने लगा यह सब देख कर चरवाहा स्वामी जी के चरणों में गिर पड़ा स्वामी जी ने आशीर्वाद देते हुए कहा की मेरे बारे में किसी से कुछ मत बताना परंतु ओरी ने अहंकार में सबको बता दिया और बाबा के दर्शन के लिए लोग आने लगे।

      इसी तरह स्वामी जी का दूसरा चमत्कार यह था की कल्याणी नदी के नेवादा घाट पर कार्तिक मेला चल रहा था इसी रास्ते से एक बंजारा बैलगाड़ी से खांड( शक्कर) ले जा रहा था बाबा ने शक्कर देखकर जब खाने की इच्छा बंजारे से की तो बंजारे ने कहा स्वामी जी से कहा बैलगाड़ी में खांड नहीं खारा(नमक) है और बंजारा जब मेला पहुंचा तो जब खांड खारा देखा सारा खांड नमक बन चुका था। बंजारे को अपनी भूल महसूस हुई और भागकर बाबा से क्षमा मांगी। स्वामी जी ने प्रसन्न भाव से कहा की खांड थी तो खांड ही होगी। बंजारा वापस आया तो देखा सभी बोरे नमक की जगह शक्कर से भरे थे। प्रसिद्ध है कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वामी जी की तपोस्थली पर लगने वाला मेला उसी बंजारे के प्रयास से लगा है इस चमत्कार से स्वामी जी का चमत्कार दूर-दूर तक फैल गया और लोगों का जमवाड़ा लगने लगा बंजारों द्वारा बनवाया गया बंजरिया ताल आज भी जाना जाता है।

         स्वामी जी हमेशा भक्तों के सामने ईश्वर को रमता राम कहा करते थे इसी के चलते स्वामी जी का ही नाम रमता राम चतुर्भुजी पड़ गया। स्वामीजी ने निर्गुणा सागर सहित कई रचनाएं की जिसमें राखी अंग अंग्रह, रामचरित कथा, हरि चरित कथा ,राम वीरहनी, राम कहरा, राम रेखता ,राम भगति ,राम बावनी, राम खुदाई, राम कराछू प्रमुख काव्य है। स्वामी जी ने अपना शरीर धरा पर नहीं त्यागा कहा जाता है की एक बार प्रयाग मेले के बाद साधु-संतों की मंडली अयोध्या से नैमिशारण्य जा रहे थे रास्ते में साधु संत बाबा के आश्रम में रुके और साधु-संतों को खाना खिलाने के दौरान स्वामी जी की लांग खुल गई संतों ने कहा की लांग खुल गई है खाना अशुद्ध हो गया है तो स्वामी जी ने कहा की जिसकी लांग खुली है वही अपनी लांग बांध लेगा इतने में स्वामी जी के शरीर से भुजाएं निकली और लांग बांध दी। यह करिश्मा देख कर संत सन्न रह गए उसी दौरान हवा का तेज बवंडर आया और स्वामी जी विलुप्त हो गए।

         बवंडर के बाद राम चबूतरा पर बाबा की खाड़ऊं कमंडल रह गए और शरीर का पता नहीं चला स्वामी रमता राम चतुर्भुजी के चार चिन्ह आश्रम में आज भी मौजूद है जिसमें स्वामी जी की खड़ाऊ कमंडल ,राम गुफा जिसमें स्वामी जी रहते थे ,रामचौतरा जिस पर बैठकर उपदेश देते थे रामसागर सरोवर जिसमें स्वामी जी स्नान करते थे। कार्तिक पूर्णिमा की शाम से दीपदान के साथ शुरू होने वाले इस सात दिवसीय मेले में मौत कुआं से लेकर हर तरह के झूलों, खिलौनों, बिसातखानों की दुकानें सज गई हैं ग्रामीण क्षेत्र का यह मेला सरकारी अभिलेखों में भले ही दर्ज न हो परंतु 9 दिनों तक चलने वाले इस मेले में दूरदराज से हजारों भक्त स्वामी जी के दर्शन के लिए आते हैं। पूर्ववती सपा सरकार के क्षेत्रीय विधायक राम गोपाल रावत सहित क्षेत्र के लोगों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कर भव्य रूप दिया गया है वर्तमान समय में आश्रम के महंत बाबा फूलदास हैं।रामपुर महोत्सव में आयोजित होने वाले कार्यक्रम:अवतारी सन्त रमता राम चतुर्भुजी की तपोस्थली रामपुर धाम में आज से शुरू हो रहे 9 दिवसीय महोत्सव को भव्य रूप देने के लिए महीनों से तैयारी की जा रही है। मेला व्यवस्थापक/ अध्यक्ष कुलदीप वर्मा ने बताया क़ि 6 नवम्बर को महोत्सव का शुभारंभ सांसद उपेंद्र सिंह रावत द्वारा किया जायेगा। 

7 नवम्बर चतुर्भुज धाम के महत्व पर निबंध लेखन प्रतियोगिता एव भारत नाटयम द्वारा आयोजित कार्यक्रम, 8 नवम्बर जागरण भगवान चतुर्भुज का गुणगान,9 नवम्बर नृत्य प्रतियोगिता तथा रात्रि में आल्हा कार्यक्रम का आयोजन, 10 नवम्बर भोजपुरी अभिनेता सांसद दिनेशलाल निहरूवा एव आम्रपाली दुबे के कार्यक्रम की प्रस्तुति, 11 नवंबर को भोजपुरी कलाकार रवियादव के कार्यक्रम की प्रस्तुति, 12 नवंबर को कुश्ती प्रतियोगिता तथा रात्रि में लोक गायन एव हास्य कवि सम्मेलन,13 नवंबर को कबडडी प्रतियोगिता तथा जिला स्तरीय प्रधान प्रतिभा सम्मेलन,14 नवम्बर को हरियाणवीं कलाकार सपना चौधरी के कार्यक्रम की प्रस्तुति तथा 15 नवम्बर को पुरुस्कार वितरण एव आतिशबाजी के साथ महोत्सव का समापन किया जायेगा। मेला व्यवस्थापक कुलदीप वर्मा ने बताया कि महोत्सव में भक्तो की भारी भीड़ के चलते व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की मांग प्रशासन से की गयी है।

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