देवदूत के रुप मे विख्यात रहे पहाड़ी बाबा

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रामनगर/बाराबंकी

रिपोर्ट/अशोक सिंह/विवेक शुक्ला

लोधेश्वर महादेवा के भूत भावन भोलेनाथ के दरबार मे देवदूत के रूप में विख्यात रहे पहाड़ी बाबा की कुटिया अभरण सरोवर के पास आज भी गुलजार है।सत्य के नाम पर स्वयं में अटल जीती जागती समूचे क्षेत्र की एक सुंदर मिसाल है।भोलेनाथ के सानिध्य मे मात्र 10 वर्ष की उम्र मे आकर जीवन गुजार देने वाले चमत्कारी संत पहाड़ी बाबा के आशीर्वाद की यादे आज भी ताजा किया करते है।मालूम हो कि लोधेश्वर महादेवा में भूत भगवान भोलेनाथ की महिमा का हजारों वर्ष पूर्व से ही अपना अहम स्थान है।महाभारत काल से लेकर कलि काल तक की तमाम कथाएं प्रचलित रही हैं।अभरण सरोवर के पास ही देवदूत के रूप में विख्यात रहे पहाड़ी बाबा की कुटिया का पावन स्थान है भोलेनाथ की नगरी में अध्यात्म के आकाश पर सूर्य की तरह प्रकाशमान रहे पहाड़ी बाबा भोलेनाथ के अनन्य भक्त थे।यह 10 वर्ष की उम्र में ही नेपाल से आकर यहां रुक गये उसके बाद जाने का नाम नही लिया।इनके पास दिखावे के नाम पर कुछ भी नहीं था।यह जो कहते थे वही सत्य होता था इस क्षेत्र के निवासियों में ग्राम बनर्की के जानकी बख्श सिह दुनकुन सिंह पंडित माता प्रसाद तथा ग्राम हनुमंता पुर के शीतला बख्श सिंह जैसे गण मान्य लोगों पर बाबा की असीम कृपा रही।पहाड़ी बाबा के जल समाधि लिये जाने से पूर्व यही लोग श्री संत के परम शिष्य जाने गये।श्रीसंत की तमाम कथाएं आज भी लोगों की यादें ताजा किया करती हैं।यह बात सन उन्नीस सौ 1952/53 की है जब श्रीसंत की मुलाकात गंगाराम शुक्ल से हुई उस समय बुढवल चौराहे पर बिहारी सिंह का होटल था।एक अच्छे संत होने के नाते बिहारी सिंह गंगाराम शुक्ल नन्हे तिवारी आलोक आदि गणमान्य उनके आज्ञाकारी शिष्य बन गये।एक दिन होटल पर काम करने वाले लड़के को सर्प ने डस लिया श्री संत ने कहा बच्चे को कहीं ना ले जाओ जिस ने काटा है वही ठीक करेगा लेकिन परिजन नहीं माने फिर भी श्रीसंत ने बच्चे को डसने वाले सांप को आवाज दी कि जब तक बच्चा ठीक हो कर नहीं आता तब तक तुम यही रहोगे कहीं नहीं जाओगे दूसरे दिन जब बच्चा ठीक होकर चिकित्सक के यहां से आया तो सभी ने देखा कि सर्प वहां से जा रहा है।एक बार गोंडा की तरफ नई बुलेट मोटर साइकिल से एक व्यक्ति जा रहा था वह राम नगर चौराहे पर बिहारी सिह के होटल पर रुक गया।जानकारो के मुताविक यह बात उस समय की है जब इंटर कॉलेज में बनर्की निवासी विजय प्रताप सिह पढ़ाई कर रहे थे उन्होंने देखा कि भीड़ के बीच में एक संत गाली देकर किसी को डांट रहा है कि आप जैसे बहुत देखे हैं व्यक्ति को सरल होना चाहिए अब यहीं बैठ कर आराम करो।कोई कुछ समझ नहीं पाया श्री संत चले गये।वह व्यक्ति अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट करने लगा गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही थी काफी परेशान होकर वह पूछताछ कर राज मिस्त्री के यहां गये उसे बुला कर लाये उसने देखा कि वाहन में कोई खराबी महसूस नही हो रही है।राजमिस्त्री पूछ बैठे कि यहां पर तुम्हारी श्रीसंत से मुलाकात तो नहीं हो गई तब उन्होंने सारी कथा कह सुनाई फिर राजमिस्त्री के अनुसार श्रीसंत को ढूढकर उनके चरणों में गिरकर क्षमा मांगी उसके बाद वह अपने गंतव्य स्थान की ओर रवाना हुये।श्री संत के यहा बड़ी संख्या में भक्त हो गये।वह अपनी जन्म भूमि नेपाल जाया करते थे नेपाल नरेश श्री संत का बड़ा ही स्वागत सम्मान किया करते थे लेकिन बताया जाता है कि वह सारा का सारा जो कुछ सम्मान स्वरुप मिलता था उसे नदी में प्रवाहित कर देते थे।अपने पास कुछ भी नहीं रखते थे।आज भी उनकी कुटिया संत महात्माओं और क्षेत्र वासियो की भीड़ से गुलजार रहती है।आज भी पहाड़ी बाबा की कुटिया को फूलों से सजाया जाता है बताते चले ग्राम बनर्की के निवासी वीरेंद्र सिंह बबलू की सांसें थम गई थी घर में कोहराम मच गया परिजन दुखी थे पहाड़ी बाबा के पास दुनकुन सिह आकर कहने लगे कि महाराज पुत्र की मौत हो गई है श्री संत ने कहा कि ऐसा नहीं है चलो हम चलते हैं श्रीसंत ने वहां जाकर आवाज लगाई चलो उठो क्यों सो रहे हो और बबलू सिह उठ बैठे।आज भी उनका हरा भरा परिवार है जो पूर्व जिला पंचायत सदस्य पप्पू सिंह के बडे भाई हैं पहाड़ी बाबा की वैसे तो तमाम कथाएं आज भी लोगों की जुबानो पर कायम है लेकिन जब वह अपने अंतिम समय में तीन परम शिष्य शीतला बक्श सिंह निवासी हनुमंता दुनकुन सिंह और कल्लू सिंह निवासी बनर्जी के साथ हरिद्वार के गंगा जी के किनारे स्नान करने के समय साथ रहते ही पहाड़ी बाबा अदृश्य हो गए।लोगों के अनुसार महाराज ने जल समाधि ले ली थी।यह लोग कई दिन वहां इधर-उधर भटकते रहे अंत में घर वापस चले आये तब से आज तक लोधेश्वर महादेवा में पहाड़ी बाबा की कुटिया सत्य की मिसाल बन कर के आकर्षण का केंद्र बिंदु है।

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