बुनियादी जरूरतों पर गौर नहीं इंटरलॉकिंग पर मेहरबान,जनप्रतिनिधि व जिम्मेदार अधिकारी

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रामनगर/बाराबंकी

रिपोर्ट/अशोक सिंह/विवेक शुक्ला

विकास खंड सूरतगंज के अन्तर्गत अधिकतर ग्राम पंचायतो के गाँवों मे जल भराव जर्जर खडन्जा चोक नाली तालाब नुमा गढ्ढे और पेय जल जैसी मूलभूत सुविधाओ से जिम्मेदार अधिकारियो और ग्राम पंचायतो का कोई विशेष लेना देना ग्रामीणो को नही दिखाई दे रहा है।केन्द्र एंव प्रदेश सरकार की ओर से किस मद के लिये धन आया है इस बात से इतर अधिकतर जन प्रति निधि और जिम्मेदार अधिकारी इण्टर लाकिंग मे नीचे बालू ऊपर बालू और नाम मात्र की गिट्टी तथा तीन चार रद्दो की बाक्सिग कर आधे से अधिक धन को बचाकर बंदर बाट करने मे खुलेआम मशगूल है।यह बात अलग है कि जिले के आलाधिकारियो की गांधारी नजरो से महा भ्रष्टाचार के मामले मे शिखर पर बैठे ब्लाक सूरतगंज अभी तक पूरी तरह से ओझल है।अधिकतर गांवो के हालात बद से बदतर है लेकिन बहती गंगा मे हाथ धोने को सब बेताब है।शिकायत कही भी करो जांच आख्या अधिकतर झूठी मिलेगी।जनहित मे जिम्मेदार बनने को कोई तैयार नही है।क्षेत्र के जागरुक जनो ने सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ से चल रहे इस महाभ्रष्टाचार पर अंकुश लगवाये जाने की मांग की है।ताजा प्रकरण ग्राम पंचायत जुरौन्डा का है।जलनिगम की टंकी और प्राथमिक विद्मालय के सामने एक वर्ष से भीषण जलभराव है। गांव वालो के शोर शराबे पर करीब एक माह होने वाले होगे ततकालीन खंड विकास अधिकारी ने स्वंय हकीकत देख कर सोख्ता गढ्ढा बनवाकर मार्ग को पटवाये जाने का निर्देश दिया था आज तक किसी के कानो मे जू तक नही रेगी।बीच गांव मे मात्र बीस ईट और पांच किलो मसाले के अभाव मे दो माह तक जलभराव रहा विवाद होने की स्थिती मे बी डी ओ ने संज्ञान लिया उसमे भी ईटे पीडित संदीप सिंह ने दी।गौरतलब बात तो यह है कि ऐसा नही है कि ग्राम पंचायत कार्य नही कर रही है जलनिगम की टंकी के सामने वाला गढ्ढे और जलभराव से जो मार्ग वर्षो से बंद है उस पर भी गढ्ढो मे मनरेगा से घास फूस डालकर ऊपर थोडी़ सी मिट्टी फेककर सड़क पटाई का कार्य समपन्न हो चुका है।लोहारन पुरवा मे दो तीन रद्दो की बाक्सिग करके चार माह से इण्टर लाकिंग लगने का इंतजार है दूसरी तरफ नीचे बालू ऊपर बालू गिट्टी नाम मात्र की डालकर जुरौन्डा मे कमलेश अवस्थी के दरवाजे वाले मार्ग पर इण्टर लाकिग लग रही है।मिक्स मैटैरियल और पर्याप्त मात्रा मे गिट्टी शायद किसी गांव के इण्टर कार्य मे मिल जाय।अधिकतर गांवो मे पेयजल के लिये वरदान माने जा रहे इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प भी आधे अधूरे गायब है।यह बात अलग है कि सरकारी अभिलेखो मे उनकी मरम्मत और रिवोर होना दर्शाया गया हो।खैर यह सब तो मात्र बानगी भर है।जिम्मेदार अधिकारियो की मनमानी के आगे गांव गांव हलकान है।आगे जो होगा वह देखा जायेगा।

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