तालाबो में भी सूखे का असर गंदा पानी पीने को विवश बेजुबान पशु पक्षी

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  रामनगर/बाराबंकी

रिपोर्ट/अशोक सिंह/विवेक शुक्ला

भले ही केन्द्र एंव प्रदेश सरकार की ओर से ग्राम पंचायतो मे बुनियादी आवश्यकताओ की पूर्ति के लिये प्रत्येक वर्ष भारी भरकम धनराशि ग्राम सभा फन्ड के रुप मे इंडिया मार्का हैण्ड पम्पो की मरम्मत तालाबो मे पानी भरवाये जाने नालियो की मरम्मत आदि कार्य के लिये दी जाती है।लेकिन विकास खंड सूरतगंज और रामनगर मे गिनती के ही ऐसै गांव है जहा फन्ड का सदुपयोग हुआ हो और उस गांव मे दर्शाये गये इंडिया मार्का हैण्ड पम्प अपनी असल संख्या मे मौजूद रहकर पानी दे रहे हो तथा इस भीषण गर्मी मे वहा के मवेशियो को तालाबो मे पीने को पानी मिल रहा हो।बदलाव की बयार कुछ इस तरह से बह रही है कि मवेशी एक एक बूद पानी के लिये तरस रहे है।गांव के प्रधान गण इन्द्र देवता की ओर आशा भरी नजरो से निहार रहे है।क्षेत्र के जागरुक जनो ने प्रदेश सरकार के मुखिया आदित्य नाथ योगी से सूखे जैसे हालात को देखते हुये इस अहम मुद्दे पर गौर फरमाये जाने की मांग की है।मालूम हो कि केन्द्र एंव प्रदेश शासन की ओर से ग्राम पंचायतो की बुनियादी जरुरतो के लिये भारी भरकम धनराशि बराबर भेजी जाती है।लेकिन अधिकतर ग्राम पंचायतो मे जिस मद के लिये धन आया है उक्त मद मे न खर्च करके मनमाने तरीके से अन्य कार्यो मे थोडा इधर उधर व्यय कर बंदरबाट कर लिया जाता है।आजकल गांवो के जिम्मेदार अधिकारियो और ग्राम प्रधानो को इण्टर लाकिंग का कार्य बहुत प्रिय है नाम मात्र की गिट्टी नीचे बालू ऊपर बालू डालकर आधे से अधिक की धनराशि बचाकर बंदर बाट कर ली जाती है।शुद्व पेयजल के लिये गांव गांव लगे तमाम इंडिया मार्का हैण्डपम्पो को अक्सर मरम्मत की दरकार रहती है।यहा पर बात इससे भी आगे है जो संख्या इनकी सरकारी अभिलेखो मे दर्ज है गिनती मे कुछ ग्राम पंचायते ऐसी मिल सकती है जहा यह इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प सरकारी अभिलेखो के हिसाब से मिल जाय तो मिल जाय।अधिकांश गावो मे आधे तिहारा चौथाई गायब हो चुके है।जानकारो के मुताविक अधिकतर गांवो मे इनकी संख्या काफी कम हो चुकी है।अब उन नलो की जर्जर अथवा सुरक्षित सामग्री पाईप नल आदि क्या हुये इस बात की तहकीकात कर पाना आसान नही है।इधर वर्षा ऋतु की बेरुखी के चलते तहसील क्षेत्र के तमाम गांवो मे तालाब के तालाब सूखे पडे हुये।जिससे पशु पक्षी छुट्टा मवेशियो सहित चरने वाले मवेशियो को एक बूद पानी अब मिल पाना आसान नही रह गया।गिनती के कुछ गांव है जहा पुराने दमदार बने तालाबो की बदौलत तमाम जीव जन्तु इस भीषण गर्मी मे वहा अपनी प्यास बुझा पा रहे है।मनरेगा योजना से करोडो अरबो रुपयो के तालाब खुदवाये गये।लेकिन वह अपनी उपयोगिता सिद्व कर पाने मे विवश दिखाई पड रहे है।हालात तो यह है सियार लोमडी खरगोश और छुट्टा मवेशी गांव गली की नालियो मे भोर पहर अथवा रात्रि मे आकर प्यास बुझाने के लिये अक्सर गाव गाव दिखाई पड रहे है।विकास खंड रामनगर के अन्तर्गत चंदीपुर के निवासी कल्लू और राम किशोर अपने डेढ दर्जन मवेशियो को चरा रहे थे।उनका कहना था कि पहले हम लोग तालाबो मे पानी न होने के चलते नदी पर ले जाते थे।इधर ब्लाक प्रमुख संजय तिवारी की ओर से अहरियो मे पानी लगातार भरवाया जाता है वहा मवेशियो को ले जाकर पानी उपलब्ध करवा रहे है।कुछ इसी तरह विकास खंड सूरतगंज की ग्राम पंचायत जुरौन्डा के हालात है।हमारे संवाददाता ने गांव गांव से उठ रही आवाजो के मद्देनजर करीब एक दर्जन गावो का भ्रमण कर सूखे कीचड युक्त और नाम मात्र गंदा पानी भरा हुआ मिला।ऐसा भी नही है कि कूप खुदवाने और तालाबो मे पानी भराने वाले खानदान धरातल से गायब हो चुके है।तेलवारी सीहामऊ जैसे गाव भी है जहा के ग्राम प्रधानो ने पशु पक्षी मवेशियो के लिये तालाबो मे बराबर पानी की देख रेख रखते है कम पडने पर व्यवस्था भी करते है।

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