द्वापर युग के ऐतिहासिक साक्षी है लोधेश्वर महादेव

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 रामनगर/बाराबंकी

रिपोर्ट/अशोक सिंह/विवेक शुक्ला

लोधेश्वर महादेवा के प्रशिद्व शिवधाम मे सावन माह भर चलने वाले मेले मे पहली बार भारतीय संस्कृति की अटूट मिशाल कायम कर शिव भक्तो को बेहद प्रभावित कर पाने की सराहनीय भूमिका ततकालीन युवा उप जिलाधिकारी गरिमा स्वरुप ने अथक प्रयास कर वर्ष 2013 के सावनी महोत्सव मे निभाकर प्रशासनिक व्यवस्थाओ मे सुधार कर जहा चार चांद लगा दिये थे।वही इस बार युवा उप जिलाधिकारी तान्या की ओर से मेले की व्यवस्थाओ के प्रति आमजनो मे दिखाई पड रही तन्मयता सावनी महापर्व के पावन माह मे भूत भावन भोलेनाथ की धरा पर पुनः अमिट छाप छोडने की तरफ आमजनो को अग्रसर दिखाई पड रही है।यह बात और है कि भाजपा सरकार की तमाम चाहत के बावजूद विगत के चार वर्षो से आलाधिकारियो की अनदेखी के चलते यहा के कजरी फाल्गुनी अगहनी और सावनी महोत्सवो के प्रति गिरावट देखी गयी है।मालूम हो कि लोधेश्वर महादेव सत्यम शिवम सुन्दरम की अवधारणा को साकार करते हुये द्वापर युग के ऐतिहासिक साक्षी है।बाराहवन नामक क्षेत्र का संशोधित नाम अब बाराबंकी है।यहा के लोधेश्वर धाम मे कोटि कोटि जन मानस अपने आराध्य देव के दर्शन पूजन और जलाभिषेक कर कल्याण की कामना करते है।बताते चले पाण्डवो के अज्ञातवाश के समय लोधेश्वर महादेव की स्थापना हुई थी।विद्वानो के अनुसार घाघरा नदी के दक्षिण तटीय रेणुक वन मे जहा 12 वर्ष तक महा मुनि वेद व्यास ने शिवार्चन पूजन एंव रुद्राभिषेक करने की सुमति दी थी।जिसके लिये माता कुन्ती के आदेश पर महाबली भीम बद्री केदार नाथ के पर्वतीय अंचल से बंहगी मे कंधे पर लाद कर दो शिला खंड लाये थे।जिसका वर्णन अवधी के सम्राट महाकवि गुरुप्रसाद मृगेश सिह के लोक महाकाव्य ग्रन्थ पारिजात मे वर्णित है।लोक सम्मति के मुताविक भीम के द्वारा लाये गये प्रथम शिला खंड की स्थापना वर्तमान मे किन्तूर के पास कुन्तेश्वर धाम मे माता कुन्ती ने तथा द्वितीय पाषाण खंड को धर्मराज युधिष्ठर ने गंडक सरयू नदी के दक्षिण मे ततकालीन तटीय वन मे किया था।वहा 12 वर्ष तक रुद्र महायज्ञ किया गया।जिसका समापन वहा से थोडी दूर पर स्थित कुरुक्षेत्र नाम के स्थान पर हवन के साथ कर दिया गया था।कालान्तर मे यह शिवलिंग सरयू नदी (घाघरा) के प्रवाह परिवर्तन से बालू मिट्टी मे दब गया।लोधेराम किसान ने जिसे कृषि कार्य के दौरान ढूढ लिया।जिसके बाद सिलौटा के बाबा बेनी सागर और रामनगर स्टेट की ओर से महाभारत कालीन शिवलिंग को मंदिर का रुप देकर चांदी कपाट तथा स्वर्णिम कलश देकर सुशोभित किया गया।राजा गरीब सिह पुत्र जोरावर सिह ने विशाल अभरन तालाब का निर्माण कराया।तब से यहा पावन मौको पर लाखो की संख्या मे शिवभक्त देश प्रदेश के सुदूर वर्ती क्षेत्रो से पैदल तथा भिन्न भिन्न वाहनो से भूत भावन भोलेनाथ के पूजन अर्चन एंव जलाभिषेक के लिये आतुर भाव से दौडे चले आते है।वर्ष 2013 मे उपजिलाधिकारी गरिमा स्वरुप ने अभरण एंव बाण हन्या सरोवर पर पहली बार महिलाओ के लिये कपडा बदलने के लिये तालाबो के पास पांडाल लगाये गये थे।नई एक अच्छी परम्परा के साथ कई अन्य सुधार करवाये।एक बार फिर युवा महिला उपजिलाधिकारी तान्या की कार्यशैली शिवभक्तो के सिर चढकर बोल रही है।पूजा पाठ एंव जलाभिषेक के कार्य मे कोई परेशानी न हो इस बात को लेकर उपजिलाधिकारी दल बल के साथ निरन्तर मेला परिसर का भ्रमण कर व्यवस्थाओ का जायजा ले रही है।उनके अथक प्रयासो की आमजनो मे सराहना हो रही है।

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