मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद भी नहीं की गई गड्ढा मुक्त सड़के और न ही किया गया तपेसिपाह बांध का मरम्मत कार्य

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सरयू नदी के पास बना ग्राम तपेसिपाह के बांध के दोनो तरफ का  किनारा बड़े बड़े गड्ढों में हुवा तब्दील

रिपोर्ट:एडिटर कृष्ण कुमार शुक्ल रामनगर बाराबंकी।उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ आने से पहले ही प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को शख्त निर्देश दिए थे की 30 जून तक बाढ़ पर नियंत्रण के लिए समय से पहले ही अपनी कमर कस ले।सूबे के मुखिया ने प्रदेश में बाढ़ प्रबंधन एवम राहत की तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा था प्रदेश के 24 जिले अतिसंवेदनशील हैं,जिनमें से बाराबंकी जिला भी अतिसंवेदनशील में आता है। बाराबंकी में सरयू(घाघरा) नदी के नाम से जानी जाती थी वह अपना कहर तराई के क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में ग्रामीणों के घरों में कटान कर तबाह कर देती है।मुख्यमंत्री ने जिले के आलाअधिकारियों को सख्त निर्देश दिया की समय से पहले बाढ़ क्षेत्र के बांधों को चेक किया जाए उनका मरम्मत कार्य किया जाए और उनको गड्ढा मुक्त किया जाए।आपको अवगत करा दें बाराबंकी जनपद की तहसील रामनगर अंतर्गत बने घाघरा संजय सेतु के पुल से बाई तरफ जो मार्ग ग्राम तपेसिपह ,कोरिनपुरवा को गया है।ठीक उसी के पास में बिल्कुल नदी से सटा हुआ बांध गांव के किनारे बना हुआ। सरयू नदी से पिछले वर्ष जो बाढ़ आई थी उससे रामनगर तहसील के तपेसीपह कोरिनपुरवा गांव में नदी ने भीषण तबाही कर कटान की थी जिससे कई घर कट गए थे।योगी सरकार ने बाढ़ से निजात दिलाने के लिए कोरिन पुरवा के पास स्थित सरयू नदी में करोड़ों रुपए की लागत से ड्रेजिंग सिल्ट सफाई कार्य किया जिससे नदी की धारा को गांवों की तरफ से हटाकर मोड़ा जा सके।करोड़ों रुपए सरकार के द्वारा ड्रेजिंग कार्य में खर्च भी कर दिए गए और बालू निकाल कर लाट बना दिया गया। ईटेंडरिंग के माध्यम से ठेकेदारों ने बालू खरीदा।अब देखना यह होगा कि जो यह कार्य ड्रेजिंग मशीन से नदी के पास में किया गया है उससे कितना फायदा लोगो को होता है।ग्रामीणों को यह जल्द ही अबकी बरसात व नेपाल से छोड़े गए पानी से पता चल जाएगा।तपेसीपह के कई ग्रामीणों का कहना है, की यह जो कार्य किया गया है अगर यह ड्रेजिंग कार्य गांव के पास में किया जाता और बालू निकालकर गांव के समीप लगाई जाती और उसको उठाया ना जाता तो शायद बचत हो सकती थी लेकिन गहराई से खुदाई होने से क्या नदी की धारा मुड़ेगी यह कई ग्रामीणों का कहना है। आपको अवगत करा दे एक सप्ताह के अंदर ही पड़ोसी देश नेपाल के द्वारा सरयू नदी में पहाड़ी पानी छोड़ा गया जिससे नदी का जलस्तर बढ़ा था।जिससे कोरिनपुरवा के पास स्थित बरगद के पेड़ के पास कटान कर रही थी।कोरिनपुरवा पुरवा के कई ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव के पास बालू ड्रेजिंग का कार्य किया जाता और एक ठोकर बना दी जाती तो मेरे गांव में कटान न होती और शायद बचत हो सकती थी।ग्रामीणों का कहना है खनन माफियाओं द्वारा

 पुक्लैंड जेसीबी से बालू निकालकर और गहरी कर दी गई सरयू नदी इससे खतरा और गांवों पर बढ़ गया है।आपको अवगत करा दें सरयू नदी के किनारे बने बांध के किनारे बड़े-बड़े गड्ढे बांध के दोनो साइड की तरफ हो गए है ,बांध के ऊपर बनी डामर की सड़क भी गड्ढों में तब्दील हो गई है जबकि प्रदेश सरकार कह रही है गड्ढा मुक्त सड़के होनी चाहिए,उसको भी गड्ढा मुक्त नहीं किया गया।बांध के किनारे मरम्मत कार्य बाढ़ खंड अधिकारियों के द्वारा किया जाना था वह भी नहीं किया गया। एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी आदर्श सिंह टीम के साथ सरयू पुल पर खड़े होकर निरीक्षण किए थे लेकिन बड़े बड़े गड्ढों में तब्दील बांध की और देखा भी नहीं ,बांध के दोनो तरफ किनारे बड़े बड़े गड्ढे हैं अगर नदी का जलस्तर बढ़ा और बांध के बराबर लेवल आया तो बांध पर खतरा नजर आएगा। अगर जल्द ही बांध के दोनो तरफ पत्थर लगाकर साइड के किनारों को मजबूती से भरा नही गया तो बांध बाढ़ के पानी से टकराकर कटकर भरभरा सकता है। सरयू नदी का जलस्तर बढ़ता है तो ग्रामीणों के घरो में नदी का पानी घुस जाता है जिससे सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पलायन करके बांध पर ही तंबू तान कर रहते हैं।आसपास के गांव जैसे कोरिनपुरवा, मल्लाहनपुरवा,दुर्गापुर सिसौंडा,परसादीपुरवा सहित कई गांवों के लोग बांध पर ही तंबू तानकर रहते है।ऐसे में अगर बांध को दुरुस्त ना कराया गया तो लोगो के लिए और मुसीबत बढ़ जाएगी।लोगो की सुरक्षा के लिए बांध ही एक मजबूत सहारा है।ग्रामीणों के बचाव के लिए अगर बांध दुरुस्त ना रहा तो ,और मुसीबत ग्रामीणों के लिए बढ़ जाएगी।एक सप्ताह पहले रामनगर उप जिलाधिकारी तान्या ने अपनी टीम के साथ बांध का निरीक्षण किया था।लेकिन अभी तक बांध का मरम्मत कार्य नहीं किया गया है।इसी क्रम में गणेशपुर बांध जो लोहटी जई चौकाघाट रेलवे लाइन से जुड़ा है,वह भी बांध सही करने वाला है,बांध के किनारे बड़े बड़े गड्ढे बने हुए हैं।अगर नदी बढ़ी तो गांवों के लिए खतरा बढ़ सकता है।इन बांधों का मरम्मत कार्य होना बाकी है।सन 2007, 2009 में सरयू नदी से भीषण बाढ़ आई थी तो गणेशपुर बांध कट गया था और सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए थे। उस समय बांधों का मरम्मत कार्य नहीं किया गया था,जिससे बड़ी तबाही सरयू नदी ने की थी। उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने जो सख्त निर्देश दिए हैं उन पर आला अधिकारी कितना खरे उतरते है। बाढ़ आने से पहले बांधों को दुरुस्त मजबूत किया जाता है की नही यह समय आने पर पता चलेगा।परंतु रामनगर तराई क्षेत्र के बहराम घाट के पास जो बांध बने हैं उनकी दशा देखने वाली है अभी तक उनका कायाकल्प नहीं किया गया है।

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