ग्राम प्रधानों ने सोशल ऑडिट करने वाली टीम पर लगाए गंभीर आरोप

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रामनगर/बाराबंकी

रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल/विवेक शुक्ल

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना का बहुत ही बुरा हाल है।फर्जीवाड़ा घोटला और वित्तीय अनियमितता की जांच करने वाली एजेंसी के ऊपर ही जब सवाल उठ रहे है तो विकास कार्य जमीन पर है कि हवा हवाई यह बताये जाने की कोई जरुरत नही है।गावो मे मनरेगा योजना से होने वाले और हो चुके विकास कार्यो के हालात बहुत बुरे है।जिसके चलते शोषल आडिट करने वाली टीम पर भी अब रिश्वत खोरी के आरोप लग रहे है।मालूम हो कि विकास खंड रामनगर की 76 ग्राम पंचायतों में विगत के 4 जून से मनरेगा योजना का सोशल ऑडिट हो रहा है।जिसमें अभी तक 24 ग्राम पंचायतों का ही सोशल हो चुका है और 52 ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट होना बाकी है। रामनगर सोशल कोऑर्डिनेटर सुमन वर्मा के ऊपर भरसवां के ग्राम प्रधान सभाजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 व 21-22 में जितने लाख का काम हुआ है उस काम का एक प्रतिशत रिश्वत के तौर पर मांगे जा रहे हैं और ना देने पर फंसाने की धमकी दी जा रही है।सूत्रों से पता चला है की ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट की जानकारी डुग्गी पिटवा के नहीं दी जाती है गुपचुप तरीके से सोशल ऑडिट कर लिया जाता है।वर्तमान ग्राम प्रधान भी चाहते हैं कि मनरेगा में कितने श्रमिकों ने काम किया है और कितने फर्जी है इसकी जानकारी विपक्षियों को ना हो और चुपचाप अपने पक्ष के लोगों को बुलाकर नाश्ता पानी कराकर और सोशल ऑडिट टीम को कुछ ले दे कर रवाना कर देते हैं।सोशल ऑडिट टीम को मनरेगा के कार्य के मास्टररोल में श्रमिकों के नाम को पढ़कर नहीं सुनाया जाता है और ना ही मास्टररोल पर श्रमिकों के हस्ताक्षर से मिलान किया जाता है।इस समबंध मे खंड विकास अधिकारी अमित त्रिपाठी से संवाददाता ने बात की तो उन्होंने बताया कि इस समय अवकाश पर हैं सोमवार को आयेगे और इसकी पूरी जांच कर उचित कार्यवाही की जायेगी।

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