लहजे खिलाफ उनके बड़े सख्त हो गए,कहते थे बात बात में कमबख्त हो गए – विकास बौखल

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सूरतगंज/बाराबंकी

रिपोर्ट/दीपक सिंह सरल

ब्लॉक सूरतगंज क्षेत्र की सुधियामऊ ग्राम पंचायत में स्थित हजरत बूढ़न शाह शहीद मर्द के 136 वे.
उर्स के दूसरे दिन ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया।जिसमे नामी शायरों और कवियों ने अपनी शायरों एवं गजलों से समा बांधा।मुशायरे का उद्धघाटन समाजवादी पार्टी बाराबंकी जिलाध्यक्ष हाफ़िज़ अयाज़ व सदस्य जिला पंचायत प्रतिनिधि बलराज सिंह बल्लू ने फीता काट कर किया।शायर वसीम रामपुरी ने पढ़ा मेरे खुदा मेरा भारत महान हो जाए,जमीन हिन्द एक आसमान हो जाए। शायर उस्मान मीनाई ने पढ़ा वायरस नफरतों का मर जाए,एक ऐसी भी वैक्सीन बना..!सायरा शाइस्ता सना ने पढ़ा उर्दू की पहचान कुछ इस तरह कराई ‘हर एक मौसम की पहचान में रहती हूं,खुश्बू बन कर मैं गुलदान में रहती हूं,हिंदू-मुस्लिम सब करते हैं प्यार मुझे,मै उर्दू हूं हिन्दुस्तान में रहती हूं’।हास्य व्यंग के कवि विकास बौखल ने पढ़ा लहजे खिलाफ उनके बड़े सख्त हो गए,कहते थे बात-बात में कमबख्त हो गए।जब तक विपक्ष में रहे वो देशद्रोही थे,बस भाजपा में आए देशभक्त हो गए।काविश रूदौलवी ने पढ़ा भाई चारा मोहब्बत वफ़ा इस तरह हम संभालते रहे,मंदिरों में जले दीप तो मस्जिदों में उजाले रहे’कारी परवेज़ यजदानी ने पढ़ा रसूल अल्लाह की सुन्नत से जिसे प्यार हो जाये,यकीन जन्नतुल फिरदौस का हकदार हो जाए,शायरा चांदनी शबनम आज का मौसम कितना सुहाना लगता है,तेरा न आना मुझको बहाना लगता है।कौन मुझे दिन वो पागल करता है,मुझको तो दिल उसका दीवाना लगता है।सभी कवियों और शायरों ने अपने कलाम पेश किया।लगभग 10 बजे रात से शुरू हुआ मुशायरा सूरज की शुरुआती किरण तक चलता रहा। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बड़ी सादगी से शायरों की हौसला अफजाई की।मुशायरे की सदारत हाफिज अयाज ने किया।निज़ामत नदीम फारूक ने बड़ी सादगी के साथ किया।इस मौके पर पूर्व सदस्य जिला पंचायत रविंद्र सिंह पप्पू,समाजवादी नेता मुज्जमिल अंसारी,प्रधान प्रतिनिधि मोहम्मद इमरान,कमेटी अध्यक्ष गुल्ले नेता,मेला कमेटी सचिव नदीम शाहिद,ग्राम पंचायत सदस्य महासभा उत्तर प्रदेश अयोध्या मंडल सचिव जान मोहम्मद राइन,बाराबंकी जिला सचिव मोहम्मद अली,अबू सालिम,मोहम्मद फरहान,राजू सिद्दीकी,मोहम्मद आलम कुरैशी,मोहम्मद आरिफ,शान वारिश,साहिल सिद्दिकी सहित सैकड़ों की संख्या में जायरीन मौजूद रहे।पुलिस व्यवस्था चाक-चौबंद रही चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर रही।

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