सोमवती अमावस्या पर महिलाओं ने बट वृक्ष की परिक्रमा कर रखा व्रत

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रिपोर्ट:विवेक शुक्ल

रामनगर (बाराबंकी)जनपद बाराबंकी की तहसील क्षेत्र रामनगर अंतर्गत शहरी एवम ग्रामीण के सभी क्षेत्रों में जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष सोमवती अमावस्या की तिथि को सुहागिनी महिलाओं ने अपने पतिओ की दीर्घायु की लंबी उम्र के लिए बट सावित्री का व्रत रख किया पूजन अर्चन मान्यता है कि सुहागिनी महिलाएं आज के दिन वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे पूजन अर्चन करती है वही पूजन में विभिन्न प्रकार के पकवान फल में खरबूजा पुवा का भोग लगाकर अपने पति की दीर्घायु होने की कामना करती है। ज्यादातर क्षेत्रों में यह त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ सुहागिन महिलाएं सोलह श्रंगार कर विभिन्न प्रकार के पकवान व फल फूल आदि भोग लगाकर प्रसाद वितरण कर दान पुण्य करती हैं इसके पश्चात पति को प्रसाद ग्रहण कराकर स्वयं प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ती हैं।मान्यता तो यह है कि माता सती सावित्री के पति सत्यवान की मृत्यु हो जाने के उपरांत अपने सतीत्व के बल पर यम का पीछा करते हुए यमलोक पहुंच कर यमराज से अपने पति के प्राणों को छुड़ाकर लाई थी माता सावित्री ने यमराज से यह भी वर मांगा कि मेरी मृत्यु जब हो तब मैं सुहागिन ही रहूं। माता सती सावित्री अपने सतीत्व के बल पर अपने पति को जीवनदान दिलाया और दीर्घायु होने का वर् भी प्राप्त किया।इसी को लेकर आज भी महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष की परिक्रमा व कच्चे धागे से सात बार परिक्रमा कर उसमें पीला सफेद धागा लपेटती है। वही सोमवती अमावस्या होने के कारण कुछ महिलाएं पीपल वृक्ष के नीचे प्रातः काल पहुंचकर 108 परिक्रमा लगा कर दान पुण्य किया।अमावस्या यदि सोमवार के दिन पड़ती है तो सोमवती अमावस्या कहलाती है इस दिन कुछ महिलाएं व्रत रखकर अन्नदान सोलह श्रंगार के सामान का दान इत्यादि करती हैं।

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