पूर्व चेयरमैन की बगावत पड़ी महंगी,उप जिलाधिकारी का हुआ तबादला

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रामनगर/बाराबंकी

रिपोर्ट/राघवेंद्र मिश्रा/कृष्ण कुमार शुक्ल

कस्बा रामनगर के पूर्व चेयरमैन रामशरण पाठक और उप जिलाधिकारी के बीच में चल रही जंग मे जिला प्रशासन की आंखो पर पड़ा परदा फट ही गया।खाद्म एंव रसद आपूर्ति राज्य मंत्री सतीश चन्द्र शर्मा की भी शुरु हुये इस विवाद मे न्याय के लिये प्रभावी भूमिका मानी जा रही है।मालूम हो कि नगर पंचायत रामनगर के पूर्व चेयरमैन रामशरण पाठक को विगत 13 तारीख को नगर पंचायत के एक पुराने मामले मे उच्चन्यायालय की ओर से स्थगन आदेश होने के बावजूद दल बल के साथ पूर्व चेयरमैन के घर पहुँचकर एसडीएम ने स्थानीय थाने पर लेजाकर वहाँ दोनों लोगो के बीच काफी देर तक हुए विवाद के मामले में आखिरकार उन्हे यहाँ से हटना ही पड़ा।जमीनी हवा और सत्य क्या है इस बात का रुख भापते हुये काबिल थानेदार संतोष कुमार सिंह ने दोनो पक्षो के मध्य एक सहमति पत्र बन जाने के बाद राहत महसूस की।बताते चले आऊट सोर्सिग के एक मामले मे ठेकेदार के द्वारा कटौती की धनराशि जमा करने का प्रावधान लिखा पढ़ी मे है जो जमा नही किये गये थे ततकालीन चेयरमैन और ई ओ के नाम उसकी आर सी जारी हो गयी। जिसका उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश भी हो चुका था।लेकिन संरक्षण प्राप्त उपजिलाधिकारी के डी शर्मा तीन घंटे तक वरिष्ठ भाजपा नेता श्री पाठक को थाने पर चली गहमा गहमी से भी संतुष्ट न हुये।उन्होने कूट रचित अवैद्म कब्जे की एक नोटिश दबाबदारी बनाये रखने के लिये उनके यहा भेज दी।गौरतलब है कि तहसील गेट के सामने गाटा संख्या 1664 मे अवैद्म कब्जा होने की नोटिश भेज दी।अब उक्त नम्बर पर डूडा द्वारा निर्मित आवास सरकारी समिति बनी है।जानकारी के तहत जो भवन तहसील प्रशासन ने श्री पाठक का मानकर उन्हे नोटिश दी है वह नौशाद उर्फ शमीम पुत्र पवली का आवास है।जिस पर भी माननीय उच्च न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश है।गौरतलब बात तो यह है कि करीब एक वर्ष के आस पास उक्त नम्बर पर कुल कितने लोग काबिज है इस बात की पूर्ण लिखा पढी तहसील प्रशासन की ओर से उच्च न्यायालय मे प्रस्तुत किया गया है।उसमे भी श्री पाठक का कोई जिक्र नही है।यहा पर बात इतनी ही नही पूर्व चेयरमैन ने प्रदेश सरकार के मुखिया सहित आलाधिकारियो को पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के उक्त नम्बरो पर स्थगन आदेश और प्रदेश सरकार के सख्त दिशा निर्देशो के बावजूद नगर पंचायत के कई तालाबो पर व्यवस्थित व्यवस्था के तहत अवैद्म निर्माण कार्य करवाये जाने का आरोप उपजिलाधिकरी के ऊपर लगाया गया है।अब क्षेत्र और जिले मे जनहित का डंका बजा रहे श्री पाठक के पास महाभ्रष्ट प्रशासन से जंग करने के सिवा कोई चारा दिखाई नही पड़ रहा था।जिसकी उन्होने घोषणा कर नोटिश भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ साथ आलाधिकारियो को भेजकर धरना प्रदर्शन करने की तैयारी शुरु कर दी।उधर यह पूरा मामला प्रदेश सरकार के खाद्म एंव रसद आपूर्ति राज्यमंत्री के संज्ञान मे आने के बाद उन्होने समस्या और गंभीर बनने से पहले यह कहते हुये जिला प्रशासन को आगाह किया कि प्रदेश के मुखिया तक सारी जानकारी जो सत्य है वह जायेगी।जिसके बाद वशीकरण मन्त्र का प्रभाव आम अवाम कम होता हुआ पाया गया।प्रशासनिक अधिकारियो के इधर से उधर भेजे जाने की प्रक्रिया सूची जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को आम हो गयी।जिस सूची मे रामनगर के एस डी एम का भी नाम प्रमुख है अन्य अधिकारियो के नाम शामिल होना एक स्वभाविक प्रक्रिया भर माना जा रहा है।क्षेत्र मे जिसकी चर्चा बडी है।अब देखने वाली बात तो यह होगी कि पूर्व चेयरमैन के ऊपर तमाम जाँच पड़तालो के बावजूद कोई गंभीर आरोप साबित नही लग सके जो लगाये गये है वह जमीन कहा है।अब लोगो मे सवाल तो इस बात का है कि पूर्व चेयरमैन की ओर से लगाये गये बहुत ही गंभीर आरोपो की जाँच पड़ताल जिला प्रशासन कब शुरु करवायेगा।

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