छोटे मार्फिन तस्करो का आखिर कौन है मसीहा,जागरूक जनों में बना चर्चा का विषय

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रामनगर/बाराबंकी

थाना रामनगर अन्तर्गत क्षेत्र मे मारफीन कथित तस्कर और पियक्कड निरन्तर पुलिस के हाथ लगते रहे है।लेकिन यह मारफीन पियक्कड़ों और दस पचास ग्राम वाले कथित तस्कारो के पास सप्लाई कहा से पहुँचती है।इस बात का कोई अता पता कभी नही चल पाता है।इस बात को लेकर क्षेत्रीय लोगो के जागरुक जनों में चर्चा का विषय बना हुआ।जागरूक जन न्याय प्रिय पुलिस कप्तान अनुराग वत्स से इसकी तह तक जाँच पड़ताल करवाकर लगाम लगाये जाने की मांग कर रहे है।जिससे निरन्तर नव युवको के इस दल दल मे फस जाने से उनकी बढ़ रही संख्या पर प्रभावी रोक लग सके।ज्ञात हो कि थाना रामनगर के क्षेत्र मे धीरे धीरे मारफीन के तस्करों व पियक्कड़ों की संख्या मे भारी इजाफा देखा जा रहा है। सुढ़ियामऊ रेलवे स्टेशन और चौराहे के आस पास अक्सर यह नशेडी देखे जाते है।कुछ वर्षो से मारफीन के नशेबाजों की संख्या लोधेश्वर महादेवा के आस पास भी बढ़ रही है।जिसके चलते शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा हो जहाँ मारफीन के पियक्कड न मिले।क्षेत्रीय पुलिस के हाथ यह नशेड़ी और दस पचास ग्राम वाले कथित तस्कर तो अक्सर लग जाते है।लेकिन क्षेत्र मे इस अवैद्म कारोबार मे कितने सफेद पोश और अपराधिक प्रष्ठ भूमि वाले लोग जुड़े है यह बात दबी की दबी रह जाती है।क्षेत्र मे निरन्तर सप्लाई मुहैया कराने वाले बडे तस्कर और इनके गठजोड़ मे कौन कौन शामिल है।लोगो का यह सवाल धरा का धरा रह जाता है।जिसके चलते एक तरफ पुलिस के हाथ मे निरन्तर दस पचास ग्राम वाले कथित तस्कर और पियक्कड़ों के मिलने का सिल सिला बना रहता है तो दूसरी तरफ बड़े तस्कर और अन्दर खाने स्थानीय लोग जो इस कार्य मे संलिप्त है वह सभी पुलिस की पकड़ से दूर रहते है।जिससे क्षेत्र के तमाम नव युवक मारफीन की गिरफ्त मे फस रहे है।जागरुक जानकारो का कहना है जब तक पुलिस इस अवैद्म कारोबार की तह तक नही पहुँचेगी और स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान कर लगाम नही लगा पायेगी तब तक धीरे धीरे बढ़ रहे मारफीन के प्रकोप से छुट्टी पाना समभव नही है।बताते चले इस अवैद्म कारोबार से जुड़े क्षेत्र के बड़े सप्लायरो को गैर जिलो मे गत और विगत के वर्षो मे थोड़े थोड़े अन्तरालो पर गिरफ्तार भी किया जाता रहा है।बताया जाता है कि इस अवैद्म कारोबार का तिलिस्म बाराबंकी बहराईच और बलरामपुर जिले से होकर नैपाल तक फैला हुआ है।जिसमे क्षेत्र के लोग भी शामिल है।जानकारो की माने तो कुछ लोग केवल इस कारोबार के लिये चार पहिया वाहन रखे हुये है वह माह मे एक दो दिन ही बाहर के लिये निकलती है और लगातार खड़ी की खड़ी ही रहती है।अब अभी नही तो कभी की चर्चा क्षेत्र मे पुलिस कप्तान की कार्यशैली को देखकर बढ़ चुकी है।लोगो ने दबी जुबान से अपनी जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह से कर्तव्य निष्ठ देखे और सुने जा रहे पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स से क्षेत्र मे चोरी छिपे चल रहे इस अवैद्म कारोबार से जुड़े लोगो की जांच पड़ताल करवाकर इस अवैद्म कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगवाये जाने की मांग की है जिससे इस तरफ आकर्षित हो चुके नव युवको के जीवन को बचाया जा सके।

रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल/विवेक शुक्ल

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