महाशिवरात्रि पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं का उमड़ा जनशैलाब

0
409

रामनगर/बाराबंकी

सुप्रसिद्ध लोधेश्वर महादेवा धाम मे महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पांच लाख से अधिक शिव भक्तों का भारी जन सैलाब उमड़ पड़ा।आधी अधूरी व्यवस्थाये शिव भक्तो के आगे बौनी रहकर पूरी तरह से नतमस्तक दिखाई पड़ रही थी। महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या से ही अपर पुलिस अधीक्षक पूर्णेन्द्र सिंह सुरक्षा व्यवस्था को और मुश्तैद बनाये जाने मे लगे हुये थे।तो सुबह पहर जिलाधिकारी डा.आदर्श सिंह और पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स ने लोधेश्वर धाम पहुंच कर शिव भक्तो के भारी जन सैलाब के मद्देनजर मेला क्षेत्र का जायजा लेकर जिम्मेदार अधिकारियो को आवश्यक दिशा निर्देश दिये।मालूम हो कि उत्तर भारत मे लोधेश्वर महादेवा के प्रसिद्व शिवधाम का बड़ा ही महत्व है।यहाँ लगने वाले विशाल मेलो मे सावनी अगहनी कजरी तीज और फाल्गुनी महोत्सव प्रमुख है।लोधेश्वर महादेवा के चल रहे फागुनी मेले में महाशिवरात्रि के पावन दिन के मौके पर ही करीब लाख से अधिक शिव भक्तों ने भूत भावन भोलेनाथ का पूजन अर्चन एवं जलाभिषेक कर मन वांछित फल की कामना की।महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या से ही बाराबंकी से लेकर के लोधेश्वर महादेवा के पावन दरबार तक शिव भक्तों के आवागमन का ताता लगा हुआ था।श्रद्धालुओं की भारी संख्या के मद्देनजर मंदिर प्रशासन के द्वारा पूजन अर्चन एवं जलाभिषेक के लिये एक बार फिर अर्ध रात्रि के बाद से ही मंदिर के कपाट खोल दिये गये थे।सुबह होते ही महादेवा के चारो तरफ शिव भक्तों का सैलाब दिखाई पड़ रहा था।रामनगर से लेकर महादेवा तक चारो तरफ आस्था का जनसैलाब दिखाई पड़ रहा था।बम बम भोले के जयकारों से संपूर्ण मेला क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था।बैरी कैटिंग के मध्य मध्य कतार बद्व होकर लोग जलाभिषेक के लिये मंदिर जा रहे थे भीड़ का आलम यह था कि मंदिर परिसर और गर्भ गृह की सुरक्षा में लगी पुलिस पसीने पसीने हो रही थी।अपर पुलिस अधीक्षक सोमवार की शाम से ही मेले में डेरा डाले रहे मंगलवार को अयोध्या कमिश्नर नवनीत रिनवा,आई जी के पी सिंह जिलाधिकारी आदर्श सिंह पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स ने सुरक्षा व्यवस्था की बारी बारी से पहुँचकर जायजा लिया।मंगलवार की देर रात्रि तक भोलेनाथ का पूजन अर्चन एंव जलाभिषेक का सिल सिला चलता है।

घण्टो लाइन में लगकर श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ कि पूजा

लोधेश्वर महादेवा के प्रशिद्व शिव धाम मे सोमवार की शाम से ही लाखों शिवभक्त श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग चुका था।आधी रात के बाद प्रसिद्ध शिव मंदिर के कपाट खुलने पर मंदिर और मेला परिषद हर हर बम बम के उद्घोष से गुंजायमान हो चला भूत भावन लोधेश्वर भोले नाथ की महिमा का वर्णन महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।हजारों वर्षों की ऐतिहासिक धरोहरों में जिसका वर्णन है इस पावन धाम का नाम भोले स्वंय लोधेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है इस स्थान के निकट राजा इंद्र के नंदनवन से लाया गया देववृक्ष पारिजात और कुंतेश्वर धाम भी है।यहा स्वयं प्रभु ने बाराह भगवान का रूप धारण किया था।बाराबंकी जनपद आज बाराहवन का संशोधित रुप है।हजारो वर्षो से महाभारत काल को सहेजे हुये लोधेश्वर महादेवा का फाल्गुनी महाशिव रात्रि महोत्सव मंगलवार की देर रात्रि के साथ अपने अन्तिम पडाव पर पहुच गया।

सुप्रसिद्ध स्थल पर कुंती व पांडवों ने किया था महायज्ञ व पूजा

लोधेश्वर महादेवा का प्रशिद्व शिव धाम सत्यम शिवम सुंदरम की अवधारणा को साकार करते हुये द्वापर युग के ऐतिहासिक समय का आज भी साक्षी हैं।यहा देश प्रदेश से कोटि कोटि जनमानस अपने आराध्य देव के दर्शन पूजन अर्चन एवं जलाभिषेक के लिये लालायित भाव से सदा दौड़े चले आते रहे हैं।मालूम हो कि लोधेश्वर महादेवा के प्रशिद्व शिव मंदिर के सिला खंड की स्थापना पांडवो ने अपने अज्ञात वाश के समय की थी।विद्वानों के मुताबिक घाघरा नदी के दक्षिण में पहुंचे पांडु जहां महामुनि वेदव्यास ने 12 वर्षो तक यज्ञ किया था। वहां माता कुंती के आदेश पर महाबली भीम ने बद्रीनाथ और केदारनाथ के पर्वतीय अंचलो मे जाकर वहां से बंहगी मे कंधे पर लादकर दो शिलाखंड लाये थे।लेखो के अनुसार भीम द्वारा लाये गये प्रथम शिला खंड की स्थापना माता कुंती ने वर्तमान किन्तूर मे की थी जो कुन्तेश्वर महादेव मंदिर के नाम से आज भी जीता जागता उदाहरण के रुप मे मौजूद है। दूसरे सिला खंड धर्मराज युधिष्ठिर ने घाघरा नदी के दक्षिण तटीय वन में स्थापित कर पूजा पाठ एंव जलाभिषेक की शुरुवात की थी।वहां 12 वर्ष तक रुद्र महायज्ञ समपन्न किया गया।कुरुक्षेत्र नामक स्थान पर हवन इत्यादि कार्यक्रम संपन्न हुये।जो स्थान महादेवा से एक किमी की दूरी पर विद्ममान है।कालांतर में घाघरा नदी के प्रवाह और चपेट मे आकर यह शिलाखंड(शिवमंदिर) मिट्टी में विलीन हो गया।जिसे लोधेश्वर नामक किसान ने खेती कार्य के दौरान खुल गया।तब से इस सिला खंड की मान्यता और प्रचार दिन दूना और रात्रि चौगुने की रफ्तार से जन जागरुकता बढती चली गयी।

रिपोर्ट/कृष्ण कुमार शुक्ल/विवेक शुक्ल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here