मुंबई में 4 अक्टूबर 2026 को एक बहुत बड़ा विरोध मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक साथ मिलकर नेतृत्व किया।
इन दोनों नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व किया। इस प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) में भारी गड़बड़ी करने और ‘वोट चोरी’ करने का आरोप लगाया गया है।
इस मार्च के दौरान उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भाजपा का ‘हथियार’ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं दे देते और उन्हें कानूनी परिणामों का सामना नहीं करना पड़ता।
सरकार पर हमले और गठबंधन का समर्थन
उद्धव ठाकरे ने मौजूदा सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने वर्तमान शासन व्यवस्था की तुलना हिटलर के तानाशाह शासन से की और सरकार के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए।
इस विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस पार्टी और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का भी समर्थन मिला। यह पूरा प्रदर्शन INDIA गठबंधन द्वारा आयोजित ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ का हिस्सा है, जो 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाला है।
अन्य पार्टियों का विरोध और दुखद घटना
देशभर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच 3 अक्टूबर 2026 को अभिजीत डिपके द्वारा स्थापित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन किया। इस दौरान एक दुखद घटना हुई जब 75 वर्षीय प्रदर्शनकारी गोपाल कृष्ण सुमैया पिल्लई को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई।
मुंबई पुलिस ने पहले CJP को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अब इस पार्टी ने धमकी दी है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग नहीं मानी गई, तो वे ‘जेल भरो आंदोलन’ करेंगे और दिल्ली की ओर ‘जंतर मंतर टू’ मार्च निकालेंगे।
दिल्ली में हिरासत और भाजपा की प्रतिक्रिया
विरोध की यह लहर दिल्ली तक भी पहुंची। वहां आम आदमी पार्टी (AAP) और लेफ्ट पार्टी के नेता जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इस पूरे विवाद पर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
- चुनाव आयोग ने 20 राज्यों में लापता और नए मतदाताओं के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।
- भाजपा ने विपक्ष के सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
- भाजपा प्रवक्ता सुधानशु त्रिवेदी ने इन दावों को मनगढ़ंत बताया और विपक्षी नेतृत्व की मंशा पर सवाल उठाए।
चुनाव प्रक्रिया की ईमानदारी को लेकर बहस जारी है और मुख्य चुनाव आयुक्त पर भारी दबाव बना हुआ है।

























