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सपा नेता मनोज कुमार का चुनाव आयोग पर हमला, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और मिलीभगत का लगाया आरोप

दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार मनोज कुमार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं।

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मनोज कुमार का दावा है कि वोटर लिस्ट से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सॉफ्टवेयर आधारित हेरफेर के माध्यम से मतदाता सूचियों में बदलाव किए जा रहे हैं।

वोटर लिस्ट में हेरफेर और ‘वोट चोरी’ का आरोप

सपा नेता ने विशेष रूप से ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया को निशाना बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत सही मतदाताओं के नामों को व्यवस्थित तरीके से हटाया जा रहा है ताकि जिसे उन्होंने ‘वोट चोरी’ कहा है, उसे अंजाम दिया जा सके।

मनोज कुमार ने यह भी दावा किया कि वर्तमान चुनाव आयोग सत्ताधारी सरकार के साथ मिलीभगत करके काम कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन गंभीर मुद्दों की वजह से उत्तर प्रदेश की सड़कों पर बड़े पैमाने पर जन विरोध शुरू होगा।

चुनाव आयुक्तों की कानूनी छूट पर सवाल

तकनीकी आरोपों के अलावा, मनोज कुमार ने चुनाव आयुक्तों को मिलने वाली कानूनी छूट को चुनौती दी है। उन्होंने ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया है।

उन्होंने मांग की कि इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। विपक्षी दल अब चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए मिलने वाली छूट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं।

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विपक्ष का विरोध और पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन पुलिस की पाबंदियों के बीच हुआ, जो चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते गुस्से का हिस्सा है। इस मामले में अन्य राजनीतिक दिग्गजों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं:

  • कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने भाजपा और चुनाव आयोग पर चुनावी अनियमितताओं में मिलीभगत का आरोप लगाया है।
  • आरजेडी सांसद मनोज झा को हाल ही में जंतर मंतर पर एक संबंधित प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।

SIR और डेटा आधारित चुनावी प्रबंधन का यह विवाद अब एक तीव्र राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। विपक्षी दल सामूहिक रूप से इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।

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