सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पोर्टल से जुड़ी संवेदनशील जानकारी कई दिनों तक इंटरनेट आर्काइव पर लीक रही। इस डेटा ब्रीच की वजह से 500 से ज्यादा फिल्मों की स्क्रिप्ट और गोपनीय व्यावसायिक समझौतों के सार्वजनिक होने का खतरा पैदा हो गया है।
द हिंदू द्वारा 25 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में यह पुष्टि की गई है कि दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दिए गए आवेदनों के दस्तावेज आम जनता के लिए उपलब्ध थे। इन दस्तावेजों में शूटिंग स्क्रिप्ट्स शामिल थीं, जिनमें शॉट-बाय-शॉट विवरण और भाषा के लिए विशेष लेबल लगाए गए थे।
लीक हुए इस डेटा में आधिकारिक कट ऑर्डर और सर्टिफिकेशन फॉर्म भी शामिल थे। यह पूरी जानकारी e-Cinepramaan पोर्टल से लीक हुई थी, जो सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के तहत फिल्म प्रमाणन के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में काम करता है।
व्यावसायिक जोखिम और सुरक्षा में चूक
हालांकि फिल्मों की मूल फाइलें सुरक्षित रहीं, लेकिन वितरण समझौतों के लीक होने से संबंधित पक्षों के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो गया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन लीक हुए अनुबंधों में लाइसेंसिंग शुल्क, लाभ साझा करने के तरीके और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारी मौजूद थी।
वेरम लीगल की मैनेजिंग पार्टनर वसुंधरा एस. ने द हिंदू को बताया कि इन शर्तों के सार्वजनिक होने से भविष्य की बातचीत कमजोर हो सकती है। इससे प्रोडक्शन हाउस के रचनात्मक और वित्तीय हितों को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
लीक हुए डेटा में कुछ खास फिल्मों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ब्राजीलियाई एकेडमी अवार्ड के लिए नामांकित फिल्म ‘द सीक्रेट एजेंट’
- हॉलीवुड की फीचर फिल्म ‘गुड लक, हैव फन, डोंट डाई’
डेटा लीक का तरीका और बोर्ड की प्रतिक्रिया
डिजिटल सबूतों से पता चला है कि इन फाइलों को एक ऐसे अकाउंट के जरिए अपलोड किया गया था, जिसमें CBFC के पूर्व चेयरमैन प्रसून जोशी के नाम का रूसी लिप्यंतरण (transliteration) इस्तेमाल किया गया था। यह सिलसिला तब रुका जब 4 अक्टूबर 2026 को e-Cinepramaan पोर्टल मेंटेनेंस के लिए ऑफलाइन कर दिया गया।
एक औपचारिक शिकायत के बाद इंटरनेट आर्काइव अधिकारियों ने 12 अक्टूबर 2026 को इस कंटेंट को हटा दिया और संबंधित अकाउंट को डिलीट कर दिया। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने कहा है कि उन्हें किसी भी फिल्म निर्माता के व्यक्तिगत अकाउंट के प्रभावित होने का सबूत नहीं मिला है।
बोर्ड ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने आरोपों की समीक्षा की है, लेकिन उन विशिष्ट प्रमाणन दस्तावेजों का कोई निशान नहीं मिला जिनके एक्सेस किए जाने का दावा किया गया था।
जांच और भविष्य की कार्रवाई
संगठन वर्तमान में एक औपचारिक सुरक्षा ऑडिट कर रहा है। इस काम में वह इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) और साइबर अपराध अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालांकि, डेटा लीक वास्तव में कैसे हुआ, इसकी सटीक प्रक्रिया अभी भी स्पष्ट नहीं है।
उद्योग के जानकार इस बात पर स्पष्टता चाहते हैं कि कंटेंट हटाए जाने से पहले कितने उपयोगकर्ताओं ने इन फाइलों को डाउनलोड किया होगा। तकनीकी विशेषज्ञ इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कितने टाइटल प्रभावित हुए हैं और क्या इसमें कुछ फर्जी रिकॉर्ड भी शामिल हो सकते हैं।
बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़े लोग अब ऑडिट के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। भविष्य के सुधारात्मक उपाय साइबर अपराध जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेंगे। सभी संबंधित पक्ष अब एक विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म की व्यवस्थागत कमजोरियों को दूर कर सके।









