भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा दे रहे 18,300 अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि पूरी होने जा रही है। इस कारण 31 दिसंबर तक ये सभी जवान सेना से बाहर हो जाएंगे। यह अग्निवीरों के पहले बड़े बैच की विदाई होगी।
अग्निपथ योजना के तहत यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इन जवानों को सेवामुक्त करने की प्रक्रिया नवंबर के मध्य से अलग-अलग चरणों में शुरू हो चुकी है। 26 अक्टूबर 2026 को हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में आधिकारिक खुलासों के आधार पर इन विवरणों की पुष्टि की गई है।
सेवामुक्ति की इस प्रक्रिया में सबसे पहले भारतीय नौसेना अपने जवानों को विदा करेगी। इसके बाद भारतीय वायु सेना और फिर भारतीय सेना में इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
अग्निपथ योजना और चयन की शर्तें
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य ऑफिसर रैंक से नीचे के कर्मियों के लिए भर्ती के पारंपरिक मॉडल को बदलना था। इस योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को एक निश्चित अवधि के लिए भर्ती किया गया था, जिसमें उनका प्रशिक्षण समय भी शामिल था।
सैन्य मामलों के विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इन भर्ती हुए जवानों में से केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी नामांकन के लिए चुना जाता है। यह चयन पूरी तरह से मेडिकल फिटनेस, संगठन की जरूरतों और व्यक्ति के प्रदर्शन के मानकों पर आधारित होता है।
वित्तीय लाभ और भविष्य की सुविधाएं
सेना से बाहर होने वाले कर्मियों को एक टैक्स-फ्री सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। इस राशि का अनुमान लगभग 11.71 लाख रुपये है। इस कुल रकम में जवान का अपना करीब 5.02 लाख रुपये का योगदान, सरकार का बराबर योगदान और पब्लिक प्रोविडेंट फंड के समान ब्याज शामिल है।
चार साल की सेवा के दौरान मासिक वेतन को सालाना बढ़ाने का प्रावधान था। इस वेतन ढांचे का विवरण इस प्रकार है:
- पहले वर्ष में अग्निवीरों को 30,000 रुपये मिले।
- दूसरे वर्ष में यह राशि 33,000 रुपये हुई।
- तीसरे वर्ष में उन्हें 36,500 रुपये मिले।
- चौथे वर्ष में यह वेतन 40,000 रुपये तक पहुंच गया।
इन भुगतानों के बाद जवानों के हाथ में आने वाली वास्तविक राशि 21,000 रुपये से 28,000 रुपये प्रति माह के बीच रही। इसके अलावा, पूरी सेवा अवधि के दौरान जवानों को 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर भी प्रदान किया गया था।
नागरिक जीवन में समायोजन और सरकारी मदद
गृह मंत्रालय ने इन जवानों के भविष्य के लिए विशेष कदम उठाए हैं। BSF, CRPF, CISF, ITBP और असम राइफल्स में कांस्टेबल और राइफलमैन की रिक्तियों में इन व्यक्तियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।
विभिन्न राज्य सरकारें भी इन पूर्व सैनिकों की मदद के लिए उपाय कर रही हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही 282 नौसेना अग्निवीरों को पुलिस कांस्टेबल के पदों पर नियुक्त किया है।
भविष्य की भर्ती और परिचालन बदलाव
वर्तमान में सेना में लगभग 270,000, वायु सेना में 27,000 और नौसेना में 21,000 जवान तैनात हैं। रक्षा मंत्रालय भविष्य के चक्रों के लिए यह तय करने हेतु प्रदर्शन डेटा की समीक्षा कर रहा है कि क्या रिटेंशन पॉलिसी यानी कर्मियों को रोकने की नीति में बदलाव की जरूरत है।
सेवा शाखाओं ने पहले बैच के प्रदर्शन पर संतोष जताया है। हालांकि, कुछ अधिकारी तकनीकी भूमिकाओं के लिए अधिक जवानों को रोकने की मांग कर रहे हैं। लेकिन फिलहाल 25 प्रतिशत की सीमा तय होने के कारण 18,300 कर्मियों का बाहर जाना तय है।
सैन्य मामलों का विभाग इस विदाई प्रक्रिया के बाद योजना में बदलाव के लिए औपचारिक सिफारिशों का मूल्यांकन करेगा। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ये अनुशासित और प्रशिक्षित युवा नागरिक कार्यबल में कितनी प्रभावी ढंग से शामिल हो पाते हैं।









