24 अक्टूबर 2026 को फ्रांस में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए। बड़ी संख्या में नागरिक सड़कों पर उतरे और बढ़ती महंगाई, जीवन यापन की लागत, शिक्षा प्रणाली की कमियों और सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के मुताबिक, पूरे देश में लगभग 4,10,000 लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए। अकेले पेरिस शहर में ही 1,10,000 प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हुई।
हालांकि कई जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन पेरिस, मार्सिले और लियोन जैसे शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी टकराव हुआ।
सुरक्षा इंतजाम और गिरफ्तारियां
अशांति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने देशभर में 70,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने टियर गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले न्याय मंत्री गेराल्ड डारमनिन ने बताया था कि 21 अक्टूबर की शाम तक 2,500 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत में लिया जा चुका था।
मार्सिले में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स में आग लगा दी, जबकि बोर्डो में कुछ लोगों ने एक दुकान का साइन बोर्ड उखाड़ फेंका। गृह मंत्री गेराल्ड डारमनिन ने पुष्टि की कि व्यवस्था बनाए रखने के दौरान 500 से अधिक पुलिस अधिकारी और फायरफाइटर्स घायल हुए हैं।
सरकार ने पहले ही 23 अक्टूबर को मार्सिले और लियोन में सभी प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही पेरिस, लियोन और अन्य प्रभावित शहरी केंद्रों में रात के समय कर्फ्यू लागू किया गया था।
प्रदर्शनकारियों की मांगें और शिक्षा की हालत
इन प्रदर्शनों में छात्र, ट्रेड यूनियन और 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य शिकायतों में स्थिर वेतन, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट और सरकार का पेंशन सुधार शामिल है।
पेंशन सुधार के तहत रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 वर्ष की जा रही है, जिसका कड़ा विरोध हो रहा है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा क्षेत्र की बड़ी विफलताओं को उजागर किया है।
- शिक्षकों की भारी कमी
- खराब बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर)
- कक्षाओं में क्षमता से अधिक भीड़
- बजट में कटौती
सरकार ने इन चिंताओं को कम करने की कोशिश की है और जरूरत वाले स्कूलों में 3,000 से अधिक अस्थायी शिक्षकों को तैनात करने की योजना की घोषणा की है।
राजनीतिक दबाव और आर्थिक संकट
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की लोकप्रियता घटकर अब केवल 15% रह गई है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक के बाद उन्होंने शांति की अपील की और प्रदर्शनकारियों से इस आंदोलन को समाप्त करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री सेबस्टियन लेकोर्नु, जिनके पास वर्तमान में संसदीय बहुमत नहीं है, ने हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्वीकार्य हैं, लेकिन आगजनी, लूटपाट और शारीरिक हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फ्रांस इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश का राष्ट्रीय कर्ज जीडीपी का 120% तक पहुंच गया है, जो यूरोज़ोन में तीसरा सबसे अधिक है। प्रशासन इस भारी सार्वजनिक दबाव के बीच रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।









