उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने सजा से बचने के लिए अपनी ही मौत का झूठा नाटक किया था। राजू, जिसे राजकुमार राजभर के नाम से भी जाना जाता है, को 25 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने उसके घर के पास से पकड़ा। वह पिछले करीब डेढ़ साल से कानून की नजरों से बचकर छिप रहा था।
38 साल के राजू के पिता का नाम स्वर्गीय रामनाथ है और वह कोटवाली नगर के ख्वाजा जहांपुर का रहने वाला है। उसे पकड़ने के लिए मऊ पुलिस की कोटवाली नगर यूनिट, एसओजी और सर्विलांस टीम ने एक संयुक्त अभियान चलाया था।
हत्या के केस से बचने के लिए रची साजिश
राजू पर 19 दिसंबर 2016 को मुनशिपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की हत्या करने का आरोप था। इस मामले में उसका ट्रायल चल रहा था और जब उसे लगा कि उसकी सजा तय है, तो उसने जेल जाने से बचने की योजना बनाई।
वह अपने ट्रेडिंग बिजनेस को बचाना चाहता था और इस पूरी साजिश में उसे दो होम्योपैथिक डॉक्टरों से आर्थिक मदद मिली थी। उन्हीं डॉक्टरों की सलाह पर राजू ने 30 मई 2025 को गाजीपुर में अपनी मौत का नाटक किया।
बकरी के शव का इस्तेमाल और AI का सहारा
अपनी मौत को असली दिखाने के लिए आरोपी ने बहुत ही अजीब तरीका अपनाया। उसने एक शव यात्रा का आयोजन किया और अपनी जगह एक बकरी को जलाया ताकि लोगों को लगे कि उसका अंतिम संस्कार हो गया है।
धोखे को और पुख्ता करने के लिए उसने चिता पर लेटे एक शव की तस्वीरें भी पेश कीं। आरोप है कि इन तस्वीरों को असली दिखाने के लिए उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उसने एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, जिससे गुमराह होकर अदालत ने उसके खिलाफ हत्या का केस बंद कर दिया।
बीमा राशि और धोखाधड़ी की जांच
पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या राजू की पत्नी ने उसकी ‘तेरहवीं’ की रस्म पूरी की थी और क्या इस बहाने करीब 10 लाख रुपये का बीमा क्लेम लिया गया है।
फर्जी दस्तावेज बनाने और कोर्ट को गुमराह करने के जुर्म में राजू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक नया मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब उन दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने उसकी मदद की। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी रिकॉर्ड और तस्वीरों को तैयार करने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया था।









