सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी Ashoke Sen स्ट्रिंग थ्योरी के क्षेत्र में अपनी बुनियादी खोजों के लिए Oskar Klein Medal पाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। Stockholm University और Royal Swedish Academy of Sciences ने 22 अक्टूबर 2026 को प्रोफेसर Sen को इस सम्मान से नवाजा है।
यह उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। बेंगलुरु के International Centre for Theoretical Sciences ने इस विकास की घोषणा की है, जहाँ प्रोफेसर Sen वर्तमान में ICTS-Infosys Madhava Chair के रूप में कार्यरत हैं।
इस खास अवसर पर उन्होंने स्टॉकहोम के AlbaNova Centre में एक व्याख्यान दिया। उनके इस Oskar Klein Memorial Lecture का शीर्षक Gravity from Strings and Strings from Gravity था।
सैद्धांतिक भौतिकी में विशेष पहचान और सम्मान
Oskar Klein समिति द्वारा यह मान्यता केवल उन शोधकर्ताओं को दी जाती है जिन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र को काफी आगे बढ़ाया हो। यह पुरस्कार किसी सामान्य लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान के बजाय विशिष्ट तकनीकी योगदान की सहकर्मी स्तर की पहचान है।
इस पदक को पाने वाले पिछले दिग्गजों में 2003 में Stephen Hawking, 2009 में Peter Higgs और 2016 में Kip Thorne शामिल रहे हैं। इसके शुरुआती प्राप्तकर्ताओं में नोबेल पुरस्कार विजेता Chen-Ning Yang (1988), Steven Weinberg (1989) और Hans Bethe (1990) शामिल थे।
स्ट्रिंग थ्योरी और शोध में महत्वपूर्ण योगदान
International Centre for Theoretical Sciences के अनुसार, प्रोफेसर Sen को S-duality, ब्लैक-होल एंट्रॉपी की सटीक गणना और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी पर उनके अग्रणी काम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है।
उनके इन योगदानों ने आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी को आकार देने में मदद की है। यह थ्योरी वर्तमान में ग्रेविटी की क्वांटम थ्योरी के लिए एक प्रमुख दावेदार बनी हुई है।
शिक्षा और पेशेवर करियर का सफर
प्रोफेसर Sen का करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। उनका जन्म 15 जुलाई 1956 को Kolkata में हुआ था और उन्होंने 1975 में Presidency College से अपना BSc पूरा किया था।
इसके बाद उन्होंने 1978 में IIT Kanpur से MSc की डिग्री हासिल की। 1982 में उन्होंने State University of New York at Stony Brook से अपनी PhD पूरी की।
1982 से 1988 के बीच उन्होंने Fermilab और SLAC में पोस्ट-डॉक्टरल पदों पर काम किया। बेंगलुरु केंद्र में शामिल होने से पहले उन्होंने TIFR Mumbai और Harish-Chandra Research Institute में फैकल्टी के तौर पर अपनी सेवाएँ दी थीं।
भारतीय विज्ञान की वैश्विक साख और उपलब्धियां
ICTS के डायरेक्टर Rajesh Gopakumar ने कहा कि Ashoke का हमारे साथ होना और संस्थान में उत्कृष्टता का माहौल बनाना शानदार रहा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मौलिक विज्ञान में देश के बढ़ते योगदान को दर्शाती है।
इस घोषणा की पुष्टि The Hindu, India Today, The Indian Express, Business Standard, Deccan Herald, The Print और The Economic Times सहित कई मीडिया संस्थानों ने की है।
प्रोफेसर Sen को पहले भी कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 1994 में Shanti Swarup Bhatnagar Prize
- 2001 में Padma Shri
- 2009 में Infosys Prize
- 2012 में Fundamental Physics में Breakthrough Prize
- 2013 में Padma Bhushan
- 2014 में Dirac Medal
इसके अलावा उन्हें 1998 में Royal Society के फेलो के रूप में चुना गया था। भौतिक विज्ञानी के रूप में उनके भविष्य के कदमों में ICTS-Infosys Madhava Chair प्रोफेसर के रूप में उनका कार्यकाल जारी रहेगा।
स्टॉकहोम में दिया गया उनका व्याख्यान अब Oskar Klein श्रृंखला के स्थायी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा है। हालांकि इस पुरस्कार के बाद किसी नए अनुदान या नियुक्ति की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यह सम्मान भारत में हो रहे उच्च स्तरीय शोध का प्रमाण है।









