अमेरिका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने नेवाडा के लास वेगास इलाके से हरियाणा के दो बड़े भगोड़े अपराधियों हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई 22 अक्टूबर 2026 को की गई। इस गिरफ्तारी के साथ ही इन दोनों की चार साल से चल रही तलाश अब खत्म हो गई है।
इन दोनों की गिरफ्तारी हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के बाद संभव हो पाई है। नेवाडा के हेंडरसन में स्थित हेंडरसन डिटेंशन सेंटर के आधिकारिक रिकॉर्ड से यह पुष्टि हुई है कि दोनों आरोपियों को फिलहाल इमिग्रेशन हिरासत में रखा गया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के अनुसार, इन दोनों ने अमेरिका में दाखिल होने के लिए फर्जी यात्रा दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, अमेरिकी अभियोजकों की तरफ से इस स्तर पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन भारतीय अधिकारी उन्हें वापस लाने के लिए निर्वासन या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने में जुटे हैं।
हिमांशु भाऊ का आपराधिक इतिहास और विदेश पलायन
हिमांशु भाऊ, जिसे हिमांशु रितोलिया के नाम से भी जाना जाता है, रोहतक जिले के रितोली गांव का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसका आपराधिक सफर अप्रैल 2018 में शुरू हुआ था जब उस पर दंगों से जुड़ी एक FIR दर्ज की गई थी।
साल 2020 में उसे हिसार के एक किशोर अवलोकन गृह (जुवेनाइल ऑब्जर्वेशन होम) में रखा गया था। अक्टूबर 2020 में उसने करीब 19 अन्य साथियों के साथ मिलकर वहां से फरार होने की घटना को अंजाम दिया था।
यह संदेह है कि उसने साल 2022 के आसपास कुणाल सिंह या हिमांशु सिग्रोहा जैसी फर्जी पहचान का उपयोग करके भारत छोड़ा था। इसी वजह से अगस्त 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था। हिमांशु का नेटवर्क कई बड़ी हिंसक घटनाओं से जुड़ा है, जिनमें शामिल हैं:
- दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित बर्गर किंग में हुई जानलेवा फायरिंग।
- गुरुग्राम में यूट्यूबर एल्विश यादव के घर पर किए गए हमले।
नीरज फरीदपुरिया के मामले और पुलिस की कार्रवाई
नीरज फरीदपुरिया, जिसे नीरज कौशिक भी कहा जाता है, का भी लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। वह पलवल जिले का निवासी है और उसके खिलाफ 25 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह 2019 में कांग्रेस प्रवक्ता विकास चौधरी की हत्या के मामले में भी शामिल था।
नीरज को 2019 में जमानत मिली थी, जिसके बाद उसने कथित तौर पर दुबई और कनाडा का रास्ता अपनाया और वहां से अमेरिका पहुंचा। हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स ने इन आपराधिक सिंडिकेट्स पर दबाव बढ़ाया है और पिछले 30 महीनों में भाऊ गैंग के 111 कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की यह कार्रवाई केवल लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े समूहों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद दूसरी सबसे बड़ी मुहिम है। भारत सरकार ने हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को पकड़ने में मदद करने वालों के लिए 10-10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा भी की थी।
विदेशी ठिकानों से संचालित क्राइम नेटवर्क का प्रभाव
हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के संगठित अपराधी अब स्थानीय ऑपरेशनों को चलाने के लिए तकनीक और विदेशी सुरक्षित ठिकानों का सहारा ले रहे हैं। अक्सर गांव के शराब विवाद या व्यक्तिगत झगड़े इन अपराधियों की वजह से बड़े आपराधिक मामलों में बदल जाते हैं।
इन दोनों की गिरफ्तारी भारतीय खुफिया एजेंसियों की पहुंच और अंतरराष्ट्रीय भगोड़ों को पकड़ने की चुनौती को दर्शाती है। पुलिस विश्लेषकों का कहना है कि युवा अक्सर खेल या स्थानीय झगड़ों के जरिए इन नेटवर्कों में शामिल होते हैं और जल्द ही बहु-राज्यीय ऑपरेशनों का हिस्सा बन जाते हैं।
जब औपचारिक प्रत्यर्पण प्रक्रिया जटिल हो जाती है, तो विदेशी धरती पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन का सहारा लिया जाता है। 24 अक्टूबर 2026 तक भारतीय एजेंसियां इन दोनों को वापस लाने के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार कर रही हैं।
अधिकारी अब भी विदेश में मौजूद उनके अन्य साथियों की निगरानी कर रहे हैं ताकि इन अवैध नेटवर्कों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।









