दिल्ली में 10 अक्टूबर 2026 को वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर बड़े पैमाने पर नागरिक अशांति फैल गई। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वापस लेना है। प्रदर्शन करने वालों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी वजह से लाखों मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
हालात को काबू में रखने के लिए प्रशासन ने सेंट्रल दिल्ली में 23,000 से ज्यादा दिल्ली पुलिस कर्मियों और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। जंतर मंतर को भारी बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है और वहां वॉटर कैनन और टीयर गैस यूनिट जैसे दंगा नियंत्रण वाहन तैनात किए गए हैं।
सुरक्षा इंतजाम और बड़े नेताओं की हिरासत
शहर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इस नियम के तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई है। पुलिस ने अब तक बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की हैं और 3,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
इनमें से 500 से ज्यादा लोगों को सिर्फ जंतर मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास के इलाकों से हटाया गया है। हिरासत में लिए गए हाई-प्रोफाइल लोगों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीतdeepcopy, नेता सौरभ दास, आशुतोष रंका और कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह शामिल हैं। इसके अलावा यूट्यूबर ध्रुव राठी और कंटेंट क्रिएटर काव्या कर्नाटक (KK Create) को भी पकड़ा गया है।
राजनीतिक दिग्गजों में ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्स को हिरासत में लिया गया है। जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे वकीलों को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया।
हिंसा और प्रदर्शन की रणनीति
भारी सुरक्षा के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी आकाशवाणी भवन के पास पहुंच गए। वहां पत्थरबाजी की घटना हुई जिसमें दो पुलिस अधिकारी घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने और गिरफ्तारियां कीं।
CJP के नेतृत्व ने पहले से ही बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों की आशंका जताई थी, इसलिए उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए अजिंक्य शिंदे को नामित किया था। वहीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शन स्थल को दिल्ली हाट शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारी अब भी जंतर मंतर की ओर ही जुट रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस का कहना है कि आवेदन अमान्य था और CJP ने पहले भी नियमों का उल्लंघन किया था।
मेट्रो सेवा और इंटरनेट पर पाबंदी
इस पूरे घटनाक्रम के कारण शहर में भारी लॉकडाउन जैसी स्थिति है। 9 अक्टूबर की शाम से 45 से 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली आने वाली 150 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया था कि कुछ ट्रेन संचालन और मेट्रो सेवाएं जारी रहनी चाहिए।
सेंट्रल दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। कनॉट प्लेस का बाजार पूरी तरह बंद है और कुछ शिक्षण संस्थानों ने अपनी क्लासेज को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दिया है।
इस बीच 47 प्रमुख नागरिकों के एक समूह ने दिल्ली पुलिस पर औपचारिक आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस दबाव बनाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है ताकि नागरिक अपने विरोध प्रदर्शन के अधिकार का उपयोग न कर सकें।









