इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका में लखीमपुर खीरी जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकार द्वारा धान खरीद की प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है।
यह याचिका शाहजहाँपुर के एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अनुराग मिश्रा ने दाखिल की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि धान खरीद में जमीन के रिकॉर्ड का गलत इस्तेमाल किया गया और इस पूरे खेल में बिचौलियों ने धोखाधड़ी की है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि असली किसानों के जमीन खाता नंबर और रजिस्ट्रेशन विवरण का उपयोग किया गया। इन विवरणों के जरिए अन्य व्यक्तियों के नाम पर विभिन्न मंडी खरीद केंद्रों पर धान खरीदा गया।
धान खरीद में धोखाधड़ी के विशिष्ट मामले
याचिका में धोखाधड़ी के कई ठोस उदाहरण दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 23 दिसंबर को लखीमपुर मंडी-V केंद्र पर बलजीत कौर के नाम पर 190 क्विंटल धान की खरीद हुई। वहीं 20 दिसंबर 2025 को लखीमपुर मंडी-VII केंद्र पर छवि गुप्ता के नाम पर 187 क्विंटल धान खरीदा गया।
अनुराग मिश्रा ने आरोप लगाया है कि इन लेनदेन में जिन खातों का उपयोग किया गया, उनके असली मालिक कोई और व्यक्ति हैं। याचिका में अन्य मंडियों के भी विवरण दिए गए हैं जहाँ नियमों की अनदेखी की गई।
- मंडी-II में अमित कुमार के नाम पर 164 क्विंटल धान की खरीद।
- मंडी-IV में हरीश कुमार मिश्रा के नाम पर 214 क्विंटल धान की खरीद।
- मंडी-VI में मनोज कुमार आर्य के नाम पर 100 क्विंटल धान की खरीद।
- मंडी-III में आलोक गौर के नाम पर 232 क्विंटल धान की खरीद।
- मंडी-IX में अंतराम के नाम पर 273 क्विंटल धान की खरीद।
- मंडी-I में मजीद अली के नाम पर 190 क्विंटल धान की खरीद।
- मंडी-VIII में प्रज्ञा गुप्ता के नाम पर 192 क्विंटल धान की खरीद।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सभी मामलों में पंजीकृत खाता संख्या और वास्तविक जमीन मालिकों के नाम आपस में मेल नहीं खाते हैं।
IGRS शिकायतों और अधिकारियों की लापरवाही
इस याचिका में IGRS शिकायतों के निपटारे के तरीके को भी चुनौती दी गई है। अनुराग मिश्रा का दावा है कि उन्होंने इस गड़बड़ी के सबूत और शिकायतें लखीमपुर खीरी के जिला मजिस्ट्रेट और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी थीं। ये शिकायतें 7 मार्च, 12 मार्च और 8 अप्रैल 2026 को जमा की गई थीं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्रीय विपणन अधिकारी (RMO) के कार्यालय ने इन शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इन शिकायतों को गलत डेटाबेस के आधार पर बंद कर दिया गया।
यह भी आरोप लगाया गया है कि डिप्टी RMO ने शिकायतों को निपटाने के लिए असली राजस्व रिकॉर्ड के बजाय त्रुटिपूर्ण डेटा का उपयोग किया। इस वजह से IGRS के माध्यम से की गई शिकायतों का सही समाधान नहीं हुआ।
कोर्ट से स्वतंत्र जांच और रिकवरी की मांग
इस याचिका में अधिवक्ता अवधेश चंद्र द्विवेदी और सौरभ कुमार मिश्रा प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। याचिका के माध्यम से कोर्ट से मांग की गई है कि इस कथित धोखाधड़ी की एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
याचिका में धान खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और सरकारी खजाने को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन करने की मांग की गई है। PIL में मांग की गई है कि इसमें शामिल अधिकारियों और व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
याचिकाकर्ता ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और गबन किए गए धन की वसूली करने की अपील की है। हालांकि, इन सभी आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही कोर्ट ने इस पर कोई फैसला सुनाया है।









