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छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को डिंपल यादव ने बताया गलत, देश के कई शहरों में तनाव

समाजवादी पार्टी की नेता Dimple Yadav ने दिल्ली, Lucknow, Mumbai और पूरे भारत में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने रिपोर्टों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ शारीरिक मारपीट की गई।

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Dimple Yadav ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका यह बयान देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के प्रदर्शनों के कारण पैदा हुए तनाव के बीच आया है।

मुंबई प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई

मुंबई में 2 अक्टूबर 2026 को Cockroach Janata Party (CJP) द्वारा एक विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस कार्यक्रम के बाद पुलिस ने शिवाजी Park में बिना अनुमति रैली आयोजित करने के आरोप में करीब 500 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

इन दर्ज मामलों में CJP के नेता भी शामिल हैं। इस बीच, National Human Rights Commission (NHRC) ने विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की मौजूदगी पर चिंता जताई है और Mumbai Police के साथ महाराष्ट्र Women and Child Development Department को नोटिस जारी किया है।

विभिन्न शहरों में विरोध और राजनीतिक आरोप

इन प्रदर्शनों के समर्थन में INDIA bloc ने 4 अक्टूबर 2026 को अपनी मार्च जारी रखने की योजना की घोषणा की है। राजधानी दिल्ली में 3 अक्टूबर 2026 को Jantar Mantar की ओर शांतिपूर्वक मार्च कर रहे वकीलों और कार्यकर्ताओं को Delhi Police ने हिरासत में ले लिया।

दूसरी ओर, दिल्ली BJP के प्रवक्ता Praveen Shankar Kapoor ने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों को बाहरी तत्व बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि Punjab से बसें लाई जा रही हैं और इसमें Jawaharlal Nehru University (JNU) के छात्र शामिल हैं।

इसी क्रम में, जयपुर में 4 अक्टूबर 2026 को एक कोचिंग सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन एक छात्र के साथ मारपीट के आरोपों के बाद शुरू हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और क्षेत्रीय हालात

इन घटनाओं के बीच जुलाई 2026 में Supreme Court की टिप्पणियां कानूनी चर्चा का केंद्र रही हैं। Chief Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच ने दोहराया कि शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मौलिक स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि बिना अनुमति लाठीचार्ज जैसे पुलिस बल के अत्यधिक उपयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट राष्ट्रीय प्रोटोकॉल जरूरी हैं।

तनावपूर्ण माहौल के बीच क्षेत्रीय स्तर पर तैयारियां जारी हैं। बिहार में पुलिस मुख्यालय ने कानून व्यवस्था संभालने के लिए जुलाई 2026 में सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी थीं।

  • बिहार में सब-इंस्पेक्टर के उम्मीदवार 5 अक्टूबर 2026 को एक बड़े आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।
  • यह आंदोलन Gandhi Maidan गेट नंबर 10 से शुरू होकर मुख्यमंत्री के आवास की ओर होगा।

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