उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा है कि 2017 से पहले ग्रामीण इलाकों में वास्तविक विकास की कमी थी। उन्होंने बताया कि पहले के समय में राजनीतिक उपेक्षा, पारदर्शिता का अभाव और जवाबदेही की कमी की वजह से गांव पिछड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ग्रामीणों को जाति और आय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कागजात बनवाने के लिए बहुत परेशानी झेलनी पड़ती थी। लोगों को इन कामों के लिए बार-बार तहसील, पुलिस स्टेशन और जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे।
Yogi Adityanath के अनुसार, पिछले नौ और आधे वर्षों में उनकी सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच आसान हो गई है।
गांवों में डिजिटल सेवाओं और सचिवालयों का विस्तार
वर्तमान सरकार के तहत अब 57,600 ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं। इन सचिवालयों के जरिए ग्रामीण निवासियों को सरकारी सेवाओं तक सीधी पहुंच मिल रही है।
इस पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए e-Gram Swaraj, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन मॉनिटरिंग का सहारा लिया गया है। इन कदमों ने पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है।
रोजगार के अवसर और डिजिटल लाइब्रेरी की पहल
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इन ग्राम सचिवालयों के संचालन से गांवों में रोजगार के नए मौके पैदा हुए हैं। हर गांव में पांच से सात रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
शिक्षा और ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब डिजिटल लाइब्रेरी भी बना रही है। वर्तमान में 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।
आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और ग्राम स्वराज का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘Gram Swaraj’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है। यह महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर गांवों के सपने को सच करने की एक प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य सशक्त पंचायतें और समृद्ध गांव बनाना है, जो एक ‘Atmanirbhar’ उत्तर प्रदेश की बुनियादी इकाइयां बन सकें। साथ ही उन्होंने शासन के ‘dynastic model’ यानी वंशवादी मॉडल को पूरी तरह खारिज किया।

























